Lucknow News: लखनऊ। राजनैतिक, अन्य दलों व संस्थाओं को लखनऊ में रैली करना भारी पड़ेगा। उनकी जेबें और ढीली होगी। यह वाकई इन दलों के लिए बुरी खबर है। लेकिन, स्मारक समिति ने इसे आय बढ़ाने का फैसला बताया है। रैली स्थलों का किराया अब करीब तीन गुणा तक बढ़ा दिया गया है। यह निर्णय भले ही आय बढ़ाने के लिए शासन ने लिया है लेकिन, अब रैली करने से पहले दलों को सोचना और समझना पड़ेगा। यह नियम नए साल से लागू होगा।
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दरअसल, स्मारक समिति ने अपनी आय बढ़ाने का निर्णय लिया है। लेकिन, चर्चा तो यह भी है कि आए दिन इन स्मारक स्थलों पर होने वाली रैलियों से जनता के साथ ही प्रशासन को भी जूझना पड़ता है। रैली स्थल की सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन को सिर दर्द झेलना पड़ता है। साथ ही राजधानी में आए दिन रैलियों से होने वाली जाम आदि की समस्या को कम करने के लिए सरकार के निर्देश पर प्रशासन ने यह कदम उठाया है। उनका मानना है कि रैली स्थलों का किराया करीब तीन गुणा तक बढ़ा देने से रैलियों की संख्या में गिरावट आएगी। इससे पूरी राजधानी को राहत मिलेगा। मिली जानकारी के अनुसार आय बढ़ाना तो मात्र एक बहाना है, सही मायने में रैलियों पर रोक लगाना सरकार का मकसद है।
कहते हैं, सरकार व प्रशासन सीधे—सीधे रैलियों पर रोक लगाने या उनकी संख्या सीमित करने को लेकर आदेश देता तो यह विपक्षी दलों के लिए एक बड़ा मुद्दा बन जाता। फिर, इसके लिए एक बड़ा आंदोलन झेलना पड़ता। इसलिए किराया बढ़ा कर उसको ढाल बना लिया गया है। नए साल से किराया बढ़ाने का फैसला स्मारक समिति ने लिया है। समिति का कहना है कि इससे उसकी आय में इजाफा होगा।
किराया, राजधानी स्थित रमाबाई रैली स्थल और स्मृति उपवन का बढ़ाया है। इसमें रमाबाई रैली स्थल का किराया 1.68 लाख से बढ़ाकर 4.48 लाख कर दिया गया है जबकि स्मृति उपवन का किराया 1.35 लाख से बढ़ाकर 3.84 लाख हो गया है।
बता दें, इन रैली स्थलों पर बढ़ाए गए किराए की दर 1 अप्रैल 2023 से लागू होगी। अब रमाबाई रैली स्थल में पार्टियों को रैली करने के लिए रोजाना 4.48 लाख रूपए और स्मृति उपवन में रैली के लिए 3.84 लाख रूपए देना होगा।