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उत्तर प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय को लखनऊ स्थित उनके आवास पर ही रोक दिया गया। बताया गया कि वह उत्तर प्रदेश के नोएडा में श्रमिकों से मिलने जाने वाले थे।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय को लखनऊ स्थित उनके आवास पर ही रोक दिया गया। बताया गया कि वह उत्तर प्रदेश के नोएडा में श्रमिकों से मिलने जाने वाले थे। लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उनके घर के बाहर घेरा डाल दिया और बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी। लखनऊ के वृंदावन योजना सेक्टर-11 स्थित आवास के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। आसपास के इलाके में सुरक्षा इतनी कड़ी कर दी गई कि पूरा क्षेत्र छावनी जैसा नजर आने लगा। उत्तर प्रदेश की इस कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। UP News
नजरबंदी के दौरान माता प्रसाद पांडेय ने उत्तर प्रदेश सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। उनका कहना था कि जब भी जनता के मुद्दे उठाए जाते हैं, तब प्रशासनिक ताकत आगे कर दी जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में मजदूरों और आम लोगों की परेशानियों को उठाना उनका कर्तव्य है और वह इससे पीछे नहीं हटेंगे। सपा नेता ने इस कदम को लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट बताया। इस घटनाक्रम के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं में नाराजगी खुलकर सामने आई। समाजवादी पार्टी का एक 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश के नोएडा में श्रमिकों से मुलाकात के लिए जाने वाला था। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह दौरा सपा प्रमुख अखिलेश यादव के निर्देश पर तय किया गया था। प्रतिनिधिमंडल का मकसद उत्तर प्रदेश के औद्योगिक इलाके में हाल में हुए श्रमिक प्रदर्शन के बाद मजदूरों की स्थिति समझना और उनका पक्ष सुनना था। नोएडा में हाल के दिनों में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन ने बड़ा रूप लिया था, जिसके बाद उत्तर प्रदेश में श्रमिक मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया। ऐसे में सपा का यह दौरा सियासी तौर पर अहम माना जा रहा था। UP News
समाजवादी पार्टी के इस दल में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के अलावा कई बड़े नाम शामिल थे। इनमें पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी, जिला अध्यक्ष सुधीर भाटी, महानगर अध्यक्ष आश्रय गुप्ता, पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर, कमाल अख्तर, विधायक अतुल प्रधान, पंकज कुमार मलिक और पूर्व एमएलसी शशांक यादव जैसे नेता शामिल बताए गए। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में इस प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को विपक्ष की सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन उससे पहले ही लखनऊ में हुई कार्रवाई ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक संवेदनशील बना दिया। UP News
इस बीच उत्तर प्रदेश के नोएडा में 13 अप्रैल को हुए श्रमिक प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने एक बड़ा दावा किया है। नोएडा पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान माहौल बिगाड़ने में कुछ संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका सामने आई है। पुलिस के अनुसार, कुछ फर्जी हैंडल के जरिए भ्रामक और भड़काऊ सामग्री साझा की गई, जिसने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने प्रेस वार्ता में कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स से मिली जानकारी के आधार पर कुछ अकाउंट्स की गतिविधियों की जांच की गई। पुलिस का दावा है कि इनमें से कुछ हैंडल पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे थे। हालांकि, इस दावे की आगे की जांच और तकनीकी पुष्टि की प्रक्रिया जारी है। UP News
पुलिस के मुताबिक, अनुषि तिवारी और मीर इलियास नाम से चल रहे कुछ एक्स हैंडल्स से कथित रूप से ऐसे पोस्ट किए गए, जिनमें नोएडा में हिंसा और मौतों को लेकर गलत जानकारी फैलाई गई। उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि इन पोस्टों ने मजदूरों की भीड़ को भड़काने का काम किया, जिससे प्रदर्शन का स्वरूप अचानक उग्र हो गया। UP News
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