लखनऊ की एक छोटी मिठाई की दुकान से शुरू हुआ यह सफर आज दुनिया की बड़ी AI इंडस्ट्री तक पहुंच चुका है। आखिर कैसे एक सामान्य परिवार के बेटे ने अपनी मेहनत से हासिल की इतनी बड़ी कामयाबी? जानिए तेजेश वैश की पूरी प्रेरक कहानी।

पिता लखनऊ के सदर बाजार में चलाते हैं मिठाई की छोटी दुकान, बेटे ने IIT कानपुर से हासिल की कंप्यूटर साइंस की डिग्री, 26 साल की उम्र में दुबई की AI कंपनी में बने लीड इंजीनियर
UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सदर बाजार, लखनऊ कैंट में एक छोटी-सी मिठाई की दुकान है। इस दुकान का नाम गायत्री मिष्ठान भंडार है। दुकान के संचालक अशोक कुमार वैश दिनभर मेहनत करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। दुकान पर मिठाइयां बनाने, समोसे और जलेबी तैयार करने से लेकर ग्राहकों को सामान बेचने तक का काम होता था। इसी दुकान के आसपास बचपन बिताने वाले अशोक कुमार वैश के बेटे तेजेश वैश ने कभी यह नहीं सोचा होगा कि एक दिन वह दुनिया की सबसे तेजी से विकसित हो रही तकनीकी इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाएंगे। बचपन में वह भी अपने पिता के साथ दुकान पर हाथ बंटाते थे। पांचवीं से नौवीं कक्षा के बीच उन्होंने कई बार दुकान के काम में अपने पिता की मदद की। समोसे और जलेबी तैयार करने से लेकर दुकान के दूसरे कामों में हाथ बंटाने तक का अनुभव उनके बचपन का हिस्सा रहा। आज वही तेजेश वैश दुबई में एक AI कंपनी में लीड इंजीनियर के रूप में काम कर रहे हैं। उनकी सालाना कमाई लगभग 2.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह कहानी केवल एक बड़े वेतन पैकेज की नहीं, बल्कि उस मेहनत और पारिवारिक सहयोग की है जिसने एक सामान्य कारोबारी परिवार के बेटे को अंतरराष्ट्रीय तकनीकी क्षेत्र तक पहुंचाया।
तेजेश वैश की कहानी का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि उनकी शुरुआती पढ़ाई में प्रदर्शन बहुत असाधारण नहीं था। उन्होंने खुद अपने शुरुआती शैक्षणिक दिनों को एक सामान्य विद्यार्थी के रूप में याद किया है। पांचवीं कक्षा में उन्हें केवल 48 प्रतिशत अंक मिले थे। लेकिन कम अंक आने को उन्होंने अपनी क्षमता की अंतिम सीमा नहीं माना। समय के साथ पढ़ाई में रुचि बढ़ी और गणित तथा समस्याओं को हल करने की क्षमता ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनके अंकों में भी लगातार सुधार हुआ। दसवीं कक्षा में उन्होंने लगभग 94 प्रतिशत और बारहवीं कक्षा में लगभग 95 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने का निर्णय लिया। यहां से उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ। UP News
बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद तेजेश ने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक साल का ड्रॉप लिया। यह समय उनके जीवन का बेहद महत्वपूर्ण दौर साबित हुआ। प्रवेश परीक्षा की तैयारी के दौरान उनका कार्यक्रम काफी कठिन था। वह प्रतिदिन लगभग छह घंटे कोचिंग करते थे और इसके बाद करीब 12 घंटे तक स्वयं पढ़ाई और सवालों का अभ्यास करते थे। कई बार उनकी पढ़ाई आधी रात तक चलती थी। उनके पिता अशोक कुमार वैश भी इस दौरान बेटे के साथ मजबूती से खड़े रहे। तैयारी के दिनों में पिता का सहयोग केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं था। वह बेटे के लिए भोजन लेकर भी पहुंचते थे। कई बार दोपहर और शाम के भोजन के डिब्बे लेकर तेजेश अपनी पढ़ाई के लिए निकलते थे। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। वर्ष 2019 में उत्तर प्रदेश राज्य प्रवेश परीक्षा (UPSEE) में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल की। इस उपलब्धि के साथ उन्हें देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शामिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई का अवसर मिला। UP News
IIT कानपुर में प्रवेश मिलना तेजेश के लिए केवल एक कॉलेज में दाखिला लेना नहीं था, बल्कि उनके सामने तकनीकी दुनिया के नए अवसरों के दरवाजे खुलने की शुरुआत थी। उन्होंने कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई की और वर्ष 2023 में 10 में से 9.14 के संचयी प्रदर्शन सूचकांक (CPI) के साथ अपनी डिग्री पूरी की। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्होंने केवल परीक्षाओं और अंकों पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने तकनीकी परियोजनाओं, शोध, इंटर्नशिप और ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भी काम किया। आर्थिक रूप से सामान्य परिवार से आने के कारण छात्रवृत्तियां भी उनके लिए काफी महत्वपूर्ण रहीं। उन्हें पीडी मुर्ति स्कॉलरशिप सहित शैक्षणिक सहायता प्राप्त हुई। इससे परिवार पर पढ़ाई का आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिली। IIT कानपुर में पढ़ाई के दौरान उन्होंने वरिष्ठ अकादमिक मेंटर के रूप में भी काम किया और 3,000 से अधिक विद्यार्थियों के मार्गदर्शन एवं सहयोग से जुड़े रहे। यह उनकी शैक्षणिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। UP News
तेजेश वैश ने कॉलेज के दौरान ही यह समझ लिया था कि केवल डिग्री हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं है। तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए वास्तविक प्रोजेक्ट पर काम करना और उद्योग की जरूरतों को समझना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने कई इंटर्नशिप कीं। टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स और सिक्यूरोनिक्स जैसी कंपनियों में काम करते हुए उन्होंने एम्बेडेड सॉफ्टवेयर, टेस्ट ऑटोमेशन और बैकएंड टूलिंग का अनुभव हासिल किया। इसके अलावा उन्होंने फ्रीलांस प्रोजेक्ट और तकनीकी कार्यों से भी अनुभव जुटाया। कॉलेज के दौरान इंटर्नशिप, फ्रीलांस काम और अन्य गतिविधियों से उन्होंने लगभग 10 लाख रुपये तक की कमाई भी की। उन्होंने कंपाइलर निर्माण, शोध और ओपन-सोर्स परियोजनाओं पर भी काम किया। इस तरह उनकी पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने तकनीक को वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए इस्तेमाल करना सीखा। UP News
IIT कानपुर से कंप्यूटर साइंस की डिग्री पूरी करने के बाद तेजेश ने तकनीकी क्षेत्र में अपना पेशेवर सफर आगे बढ़ाया। इस दौरान उन्होंने कई कंपनियों में काम करके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अनुभव हासिल किया। उनके पेशेवर सफर में अबेकस.AI और अन्य तकनीकी संस्थानों में काम करने का अनुभव भी शामिल है। इसके बाद उन्हें दुबई में एक AI कंपनी में लीड इंजीनियर के रूप में काम करने का अवसर मिला। वह दुबई में Lumian.ai से जुड़े हैं। यहां उनका काम AI एजेंट तैयार करना, ऐसे सॉफ्टवेयर सिस्टम विकसित करना और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है, जिनकी मदद से कंपनियां अपने कामकाज को अधिक प्रभावी और स्वचालित बना सकें। AI एजेंट ऐसी तकनीक है जिसके माध्यम से कंप्यूटर आधारित सिस्टम केवल निर्देशों का जवाब देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उपलब्ध जानकारी और निर्धारित अनुमतियों के आधार पर कई चरणों वाले काम भी कर सकते हैं। तेजेश का काम ऐसे ही AI सिस्टम को उपयोगी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने से जुड़ा है। UP News
तेजेश वैश को दुबई में लगभग 2.5 करोड़ रुपये सालाना के पैकेज पर काम करने का अवसर मिला है। यह पैकेज उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि है।
हालांकि यह समझना जरूरी है कि यह सालाना CTC यानी कुल वार्षिक कॉस्ट टू कंपनी है। इसे सीधे हाथ में मिलने वाली सालाना सैलरी नहीं माना जाना चाहिए। जिस परिवार की आजीविका एक छोटी मिठाई की दुकान पर निर्भर थी, उसी परिवार का बेटा आज अंतरराष्ट्रीय तकनीकी बाजार में अपनी विशेषज्ञता के दम पर करोड़ों रुपये का पैकेज हासिल कर रहा है। तेजेश के लिए इस सफलता का सबसे भावुक पहलू यह है कि अब वह अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने में योगदान दे पा रहे हैं। UP News
तेजेश वैश की सफलता का सबसे खूबसूरत पहलू उनके परिवार के प्रति उनका लगाव है। उन्होंने अपनी उपलब्धियों को केवल व्यक्तिगत विलासिता या ऊंचे जीवन स्तर तक सीमित नहीं रखा है। वह दुबई में अपनी कमाई का एक हिस्सा बचत और निवेश में लगाते हैं तथा लखनऊ में अपने परिवार के लिए नया घर बनवा रहे हैं। इससे पहले उनके पिता ने छोटी-सी मिठाई की दुकान चलाकर परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं और बेटे की पढ़ाई को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग दिया। आज बेटा अपनी मेहनत की कमाई से माता-पिता के लिए बेहतर घर तैयार कर रहा है। तेजेश की यह उपलब्धि बताती है कि किसी भी परिवार की आर्थिक पृष्ठभूमि चाहे जैसी हो, शिक्षा और अवसरों के माध्यम से अगली पीढ़ी अपने परिवार की परिस्थितियों को बदलने की क्षमता रखती है। UP News
तेजेश वैश की कहानी का एक और महत्वपूर्ण संदेश उन युवाओं के लिए है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। हालांकि तेजेश ने IIT कानपुर से पढ़ाई की है, लेकिन उनका मानना है कि AI के क्षेत्र में सफल होने के लिए केवल IIT की डिग्री ही जरूरी नहीं है। दूसरे इंजीनियरिंग कॉलेजों के विद्यार्थी भी अपनी मजबूत तकनीकी नींव, व्यावहारिक परियोजनाओं और लगातार सीखने की आदत से इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं। उनके अनुभव के आधार पर विद्यार्थियों के लिए प्रोग्रामिंग, Python, SQL, डेटा स्ट्रक्चर, गणित, सांख्यिकी और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की अच्छी समझ जरूरी है।
AI में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को मशीन लर्निंग, PyTorch, Hugging Face और आधुनिक AI टूल्स की जानकारी भी हासिल करनी चाहिए। साथ ही ओपन-सोर्स परियोजनाओं में योगदान देना और वास्तविक समस्याओं को हल करने वाले प्रोजेक्ट बनाना उनके कौशल को मजबूत कर सकता है। तेजेश की सलाह का सार यह है कि तकनीकी टूल का इस्तेमाल करना सीखना जरूरी है, लेकिन उनके द्वारा तैयार किए गए परिणामों को समझना, जांचना और उनकी जिम्मेदारी लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। UP News
तेजेश वैश की कहानी उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा है जो स्कूल में कम अंक आने या प्रतियोगी परीक्षाओं में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के कारण निराश हो जाते हैं। पांचवीं कक्षा में 48 प्रतिशत अंक हासिल करने वाला विद्यार्थी आगे चलकर IIT कानपुर में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करता है, 9.14 CPI के साथ ग्रेजुएशन पूरी करता है और 26 वर्ष की उम्र में दुबई की AI इंडस्ट्री में लीड इंजीनियर बन जाता है। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि किसी विद्यार्थी का भविष्य केवल उसके शुरुआती परीक्षा परिणामों से तय नहीं होता। सही दिशा, लगातार अभ्यास, मेहनत, परिवार का सहयोग और सीखने की इच्छा से परिस्थितियां बदली जा सकती हैं। UP News
उत्तर प्रदेश लंबे समय से शिक्षा, व्यापार, उद्योग और तकनीकी प्रतिभाओं का केंद्र रहा है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों और कस्बों से निकलकर युवा देश और विदेश में अपनी पहचान बना रहे हैं। तेजेश वैश की कहानी इस बदलाव की एक प्रेरक मिसाल है। यह कहानी बताती है कि आज किसी छोटे कारोबारी का बेटा भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्र में दुनिया के बड़े बाजारों तक पहुंच सकता है। इस सफलता के पीछे किसी बड़े कारोबारी घराने की विरासत नहीं, बल्कि एक पिता की मेहनत, मां का साथ, बेटे की पढ़ाई के प्रति लगन, छात्रवृत्ति, तकनीकी अनुभव और लगातार खुद को बेहतर बनाने की कोशिश है। लखनऊ के सदर बाजार की मिठाई की दुकान से दुबई की AI कंपनी तक का तेजेश वैश का सफर उत्तर प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को यह भरोसा देता है कि सपने देखने के लिए बड़ी आर्थिक पृष्ठभूमि जरूरी नहीं है। जरूरी है उन सपनों को पूरा करने के लिए सही दिशा में लगातार मेहनत करना। UP News
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