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UP News /लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां वेस्ट यूपी के कुख्यात बदमाश संजीव जीवा की कोर्ट परिसर में बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा कर हत्या कर दी है। कुख्यात जीवा आज कोर्ट में पेशी पर आया था। कोर्ट से निकलते समय बदमाश ने उसे गोली मारी। इस शूटआउट में एक लड़की समेत दो लोग घायल हुए हैं।
राजधानी लखनऊ के केसरबाग में स्थित सिविल कोर्ट में आज वकीलों की ड्रेस पहनकर आए एक अज्ञात बदमाश ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात बदमाश संजीव जीवा उर्फ महेश्वरी की गोली मारकर हत्या कर दी। बदमाशों ने जब फायरिंग की तो कोर्ट परिसर में भगदड़ मच गई। मारे गए बदमाश जीवा पर कई संगीन मामले दर्ज थे। वेस्ट यूपी में जीवा का अच्छा खासा खौफ था। बदमाश ने जीवा को पांच गोली मारी, जिस वजह से जीवा वहीं पर ढेर हो गया।
वकीलों व मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने हमलावर को दबोच लिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कुख्यात डॉन जीवा ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्याकांड में शामिल था। इसके अलावा कृष्णानंद राय हत्याकांड का भी उस पर आरोप लगा था। जीवा मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी गैंग का भी सदस्य रह चुका है। अपहरण, हत्या व फिरौती सहित उस पर लगभग 22 मुकदमें दर्ज थे, जिनमें से 17 मुकदमों में वो बरी हो चुका था।
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बात पश्चिमी यूपी के कुख्यातों की हो तो संजीव जीवा का नाम सामने आता है। संजीव जीवा मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। शुरुआती दिनों में वह एक दवाखाना संचालक के यहां कंपाउंडर के नौकरी करता था। इसी नौकरी के दौरान जीवा ने अपने मालिक यानी दवाखाना संचालक को ही अगवा कर लिया था। इस घटना के बाद उसने 90 के दशक में कोलकाता के एक कारोबारी के बेटे का भी अपहरण किया और दो करोड़ की फिरौती मांगी थी। उस वक्त किसी से दो करोड़ की फिरौती की मांग होना भी अपने आप में बहुत बड़ी होती थी। इसके बाद जीवा हरिद्वार की नाजिम गैंग में घुसा और फिर सतेंद्र बरनाला के साथ जुड़ा लेकिन उसके अंदर अपनी गैंग बनाने की तड़प थी।
इसके बाद उसका नाम 10 फरवरी 1997 को हुई भाजपा के कद्दावर नेता ब्रम्ह दत्त द्विवेदी की हत्या में सामने आया। जिसमें बाद में संजीव जीवा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। फिर जीवा थोड़े दिनों बाद मुन्ना बजरंगी गैंग में घुस गया और इसी क्रम में उसका संपर्क मुख्तार अंसारी से हुआ। कहते हैं कि मुख्तार को अत्याधुनिक हथियारों का शौक था तो जीवा के पास हथियारों को जुटाने के तिकड़मी नेटवर्क था। इसी कारण उसे अंसारी का वृहदस्त भी प्राप्त हुआ और फिर संजीव जीवा का नाम कृष्णानंद राय हत्याकांड में भी आया।
हालांकि, कुछ सालों बाद मुख्तार और जीवा को साल 2005 में हुए कृष्णानंद राय हत्याकांड में कोर्ट ने बरी कर दिया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा पर 22 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए। इनमें से 17 मामलों में संजीव बरी हो चुका है, जबकि उसकी गैंग में 35 से ज्यादा सदस्य हैं। वहीं, संजीव पर जेल से भी गैंग ऑपरेट करने के आरोप लगते रहे हैं। हाल ही में उसकी संपत्ति भी प्रशासन द्वारा कुर्क की गई थी।
जीवा पर साल 2017 में कारोबारी अमित दीक्षित उर्फ गोल्डी हत्याकांड में भी आरोप लगे थे, इसमें जांच के बाद अदालत ने जीवा समेत 4 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि जीवा फिलहाल लखनऊ की जेल में बंद है, लेकिन साल 2021 में जीवा की पत्नी पायल ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर कहा था कि उनकी (जीवा) जान को खतरा है। बता दें कि, पायल 2017 में आरएलडी के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ चुकी हैं और उन्हें हार मिली थी।
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