प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी कुकरैल नाइट सफारी एवं जूलॉजिकल पार्क परियोजना को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति तो दे दी है, लेकिन साथ ही पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी कई सख्त शर्तों का पालन अनिवार्य कर दिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी कुकरैल नाइट सफारी एवं जूलॉजिकल पार्क परियोजना को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति तो दे दी है, लेकिन साथ ही पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी कई सख्त शर्तों का पालन अनिवार्य कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है और परियोजना केवल निर्धारित शर्तों के अनुरूप ही आगे बढ़ाई जा सकेगी।
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मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि परियोजना को केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति सीईसी और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा तय की गई शर्तों के अनुरूप ही लागू किया जाएगा। अदालत ने सीईसी को समय-समय पर परियोजना स्थल का निरीक्षण करने और पहली अनुपालन रिपोर्ट तीन महीने के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकतार्ओं की ओर से दलील दी गई कि परियोजना से पूरे कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट के पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ेगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधुनिक समय में वन्यजीव संरक्षण के नए मॉडल विकसित किए जा रहे हैं और विशेषज्ञों की निगरानी में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सकता है। अदालत ने भरोसा जताया कि परियोजना के दौरान संरक्षण संबंधी सभी आवश्यक उपाय अपनाए जाएंगे।
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सीईसी ने अपनी रिपोर्ट में राज्य सरकार के उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया, जिसमें लखनऊ चिड़ियाघर को कुकरैल स्थानांतरित करने की योजना थी। समिति ने जंगल की संवेदनशीलता को देखते हुए इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसके अलावा जंगल से गुजरने वाली सड़क को चार लेन के बजाय दो लेन तक सीमित रखने की सिफारिश की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार इस परियोजना को देश की पहली अर्बन नाइट सफारी के रूप में विकसित करना चाहती है। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा और इसका उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा तथा इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना है। हालांकि अब परियोजना की प्रगति सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय शर्तों और नियमित निगरानी पर निर्भर करेगी।
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परियोजना के प्रारंभिक स्वरूप में प्रस्तावित एडवेंचर जोन, ट्राम सेवा, रात में जंगल भ्रमण और आॅगमेंटेड रियलिटी आधारित गतिविधियों को भी हटाने की सिफारिश स्वीकार कर ली गई है। इसके साथ ही राज्य सरकार को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की सभी गाइडलाइन का पालन करना होगा और पर्यावरणीय मानकों की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र ओवरसाइट समिति गठित करनी होगी। समिति ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं पेड़ों की कटाई की अनुमति होगी, जो परियोजना के पुन: डिजाइन, री-अलाइनमेंट या इंजीनियरिंग कार्यों के लिए बिल्कुल आवश्यक हों। साथ ही प्रत्येक एक पेड़ की कटाई के बदले कम से कम 10 नए पौधे लगाने होंगे। इसके अलावा वन्यजीवों पर शोर, रोशनी और वाहनों के प्रभाव को न्यूनतम रखने के लिए विशेष प्रबंधन योजना लागू करनी होगी।
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