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प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट में मदरसों की जांच को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस सामने आई है। इसमें मानवाधिकार आयोग को कोर्ट ने दायरे में रहकर काम करने को कहा है।

UP News : उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट में मदरसों की जांच को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस सामने आई है। इसमें मानवाधिकार आयोग को कोर्ट ने दायरे में रहकर काम करने को कहा है। सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि क्या मानवाधिकार आयोग को इस प्रकार की जांच के निर्देश देने का अधिकार है या नहीं। अदालत ने संकेत दिया कि आयोग को अपने वैधानिक दायरे में रहकर ही कार्रवाई करनी चाहिए। यह पहलू आगे की सुनवाई में कानूनी बहस का प्रमुख केंद्र बन सकता है। UP News
इस मामले की सुनवाई कर रही डिवीजन बेंच के दो न्यायाधीशों, जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन के बीच कुछ बिंदुओं पर मतभेद भी सामने आया है। जहां एक ओर जस्टिस श्रीधरन ने एनएचआरसी की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की, वहीं जस्टिस सरन ने उन टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस मतभेद के चलते मामला आगे बड़ी बेंच (लार्जर बेंच) को भेजा जा सकता है। UP News
यह मामला केवल मदरसों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे मानवाधिकार आयोग की भूमिका, उसके अधिकार क्षेत्र और संवेदनशील मामलों में उसकी कार्यप्रणाली पर भी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में अदालत का अंतिम निर्णय यह तय करेगा कि ऐसे मामलों में जांच के आदेश देने की प्रक्रिया और सीमाएं क्या होंगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणियों और अंतरिम आदेश के बाद यह मामला एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। अब सबकी नजर 11 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर है, जहां यह स्पष्ट हो सकेगा कि मदरसों की जांच, एनएचआरसी की भूमिका और कानून के दायरे को लेकर अदालत का अंतिम रुख क्या होगा। UP News
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