इस विवाद में द्वारका पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया। उन्होंने प्रशासन पर सत्ता के अहंकार का आरोप लगाया और कहा कि अधिकारियों को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने पुलिस द्वारा ब्राह्मणों की शिखा के अपमान की निंदा की और जोर देकर कहा कि सत्ता हर समय नहीं रहती।

UP News : प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर स्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और पुलिस के बीच तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई। पालकी के माध्यम से स्नान कराने के प्रयास को रोकने पर उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद मेला प्राधिकरण ने अविमुक्तेश्वरानंद को उनके नाम के आगे "शंकराचार्य" लगाने को लेकर नोटिस जारी किया, जबकि मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ई-मेल के माध्यम से 8 पृष्ठ का विस्तृत जवाब भेजा। उन्होंने नोटिस को अनुचित, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया और चेतावनी दी कि नोटिस वापस नहीं लिया गया तो वे कोर्ट में मानहानि का दावा करेंगे।
इस विवाद में द्वारका पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया। उन्होंने प्रशासन पर सत्ता के अहंकार का आरोप लगाया और कहा कि अधिकारियों को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने पुलिस द्वारा ब्राह्मणों की शिखा के अपमान की निंदा की और जोर देकर कहा कि सत्ता हर समय नहीं रहती।
इसके अलावा, उन्होंने उन लोगों को चेताया जिन्होंने गंगा स्नान पर रोक लगाने की कोशिश की, इसे पापपूर्ण कार्य बताया। इस घटना ने प्रयागराज मेला प्रशासन और धार्मिक नेतृत्व के बीच तनाव को बढ़ा दिया है, और विवाद का समाधान अभी कोर्ट के माध्यम से होने की संभावना है। अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन अब संत समाज के अन्य संत भी कर रहे हैं, इसी क्रम में शंकराचार्च सदानंद सरस्वती ने उनका समर्थन किया है।