महराजगंज में दो माह के मासूम विक्की के अपहरण और अमावस्या पर बलि देने की कथित साजिश का खुलासा। IPS शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में पुलिस ने दिल्ली के कश्मीरी गेट से बच्चे को सकुशल बरामद कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

UP News : उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले से सामने आई दो माह के मासूम बच्चे के अपहरण की घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। जिस उम्र में एक बच्चा अपनी मां की गोद में सुरक्षित महसूस करता है, जिस उम्र में उसे दुनिया की समझ तक नहीं होती, उसी उम्र में उसे अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के नाम पर मौत के मुंह में धकेलने की खौफनाक साजिश रची गई। हैरानी की बात यह है कि इस पूरी साजिश में किसी अनजान अपराधी का नहीं, बल्कि परिवार और परिचित दायरे से जुड़ी महिलाओं का नाम सामने आया है। महराजगंज पुलिस के मुताबिक, दो महीने के मासूम विक्की का अपहरण इसलिए किया गया था, ताकि अमावस्या के दिन उसकी बलि दी जा सके। पुलिस की पूछताछ में सामने आई कहानी के अनुसार, परिवार में वर्षों से लापता पति और बेटे की वापसी तथा परिवार में हो रही अकाल मृत्यु को रोकने की चाहत ने आरोपियों को ऐसे अंधविश्वास की गिरफ्त में पहुंचा दिया, जहां एक मासूम की जिंदगी की कोई कीमत नहीं रह गई थी। इस सनसनीखेज मामले का खुलासा महराजगंज के पुलिस अधीक्षक एवं IPS अधिकारी शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में गठित पुलिस टीम ने किया। महराजगंज से लेकर दिल्ली के कश्मीरी गेट बस स्टैंड तक पुलिस ने सुरागों का पीछा किया। 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, सर्विलांस, स्थानीय सूचना तंत्र और डॉग ट्रैकर स्क्वायड के खोजी प्रयासों की मदद से आखिरकार मासूम विक्की को सकुशल बरामद कर लिया गया। इस मामले में दो महिलाओं समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह केवल अपहरण की वारदात नहीं, बल्कि अंधविश्वास के नाम पर इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक ऐसी घटना है, जिसने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर तंत्र-मंत्र और चमत्कारों के नाम पर कोई इंसान इतना क्रूर कैसे हो सकता है ?
इस पूरे घटनाक्रम में महराजगंज के पुलिस अधीक्षक IPS शक्ति मोहन अवस्थी की भूमिका महत्वपूर्ण रही। घटना की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने शुरुआत से ही मासूम की सकुशल बरामदगी को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए थाना ठूठीबारी पुलिस, एसओजी, स्वाट, सर्विलांस और डॉग ट्रैकर स्क्वायड की संयुक्त टीमें सक्रिय कीं। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि अपहरण के बाद बच्चा कहां ले जाया गया है, इसका कोई स्पष्ट सुराग नहीं था। घटना रात के समय हुई थी और अपहरणकर्ता पुलिस से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदल सकते थे। ऐसे में पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में जांच को कई दिशाओं में आगे बढ़ाया गया।
पुलिस ने सबसे पहले घटनास्थल का निरीक्षण कराया। इस दौरान डॉग ट्रैकर स्क्वायड के खोजी कुत्ते विराट की मदद ली गई। इसके बाद पुलिस टीमों ने आसपास के रास्तों और संभावित आवागमन वाले स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। जांच में सामने आया कि 3 नवंबर 2026 की रात करीब 2 बजे से सुबह 4 बजे के बीच ग्राम राजाबारी टोला रमजीता में गोविंद पुत्र नंदलाल के घर से उनका दो महीने का बेटा विक्की गायब हो गया था। गोविंद अपनी पत्नी और बच्चे के साथ घर में सो रहे थे। इसी दौरान किसी ने घर में प्रवेश कर बच्चे को उठा लिया। परिजनों के लिए यह किसी बड़े सदमे से कम नहीं था। एक तरफ मां की गोद सूनी हो गई थी तो दूसरी तरफ परिवार को यह तक पता नहीं था कि उनका मासूम बच्चा किसके कब्जे में है।
पुलिस की जांच में एक महत्वपूर्ण सुराग सुबह करीब 3 बजकर 57 मिनट पर मिला। सीसीटीवी फुटेज में राजाबारी पुल के पास एक संदिग्ध महिला हाथ में बच्चा लेकर निचलौल रोड की तरफ जाती दिखाई दी।इसके बाद पुलिस ने एक-एक करके आगे के रास्तों पर लगे कैमरों की फुटेज देखी। महिला ठूठीबारी बस स्टैंड तक जाती दिखाई दी। बस स्टैंड के आसपास पूछताछ के दौरान एक बस चालक से पुलिस को अहम जानकारी मिली। चालक ने बताया कि संदिग्ध महिला सुबह करीब 5 बजे बस में बैठी थी और शिकारपुर मोड़ पर उतर गई थी। इसके बाद वह घुघली की तरफ गई। यही वह सुराग था जिसने जांच की दिशा बदल दी।
सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय पूछताछ और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस ने संदिग्ध महिला की पहचान सावित्री पत्नी स्वर्गीय उमेश राजभर निवासी ग्राम कफवा, थाना घुघली, जनपद महराजगंज के रूप में की। पुलिस टीम जब सावित्री के घर पहुंची तो वह वहां नहीं मिली। फोन पर भी उससे स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही थी। इसके बाद पुलिस ने सर्विलांस और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से उसकी लोकेशन का पता लगाना शुरू किया। जांच में यह स्पष्ट होने लगा कि मामला केवल स्थानीय स्तर पर बच्चे को छिपाने का नहीं है, बल्कि अपहरणकर्ता महराजगंज से बाहर निकल चुके हैं।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में पुलिस टीम ने तकनीकी इनपुट के आधार पर संदिग्धों की लोकेशन का लगातार पीछा किया। महराजगंज से शुरू हुई तलाश दिल्ली तक पहुंच गई। नई दिल्ली के कश्मीरी गेट बस स्टैंड पर पुलिस को सावित्री अपने साथी करण कुमार गौतम के साथ मिली। उनके पास एक शिशु भी था। जब पुलिस ने दोनों से बच्चे के संबंध में पूछताछ की तो वे कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दे सके। इसके बाद पुलिस टीम ने बच्चे का फोटो मुकदमे के वादी गोविंद को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजा। गोविंद ने फोटो देखकर बच्चे की पहचान अपने बेटे विक्की के रूप में कर दी। इस तरह कई घंटों की बेचैनी और लगातार चल रही पुलिस की तलाश के बाद दो महीने का मासूम अपने माता-पिता तक पहुंचाने के लिए सुरक्षित बरामद कर लिया गया। मासूम को आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
इस मामले का सबसे भयावह पहलू पुलिस पूछताछ में सामने आया। महराजगंज पुलिस के प्रेस नोट के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि दो महीने के मासूम विक्की का अपहरण किसी फिरौती या पारिवारिक विवाद के लिए नहीं किया गया था। इसके पीछे कथित रूप से अंधविश्वास और बलि देने की खौफनाक योजना थी। पुलिस के अनुसार, आरोपियों का विश्वास था कि दो महीने के मासूम की बलि देने से परिवार की समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। सरस्वती का कई वर्षों से लापता पति और पुत्र वापस आ जाएंगे तथा परिवार में पहले हुई अकाल मृत्यु की घटनाएं रुक जाएंगी। इस कथित साजिश में नेपाल के बैरियहवा में झाड़-फूंक करने वाले एक व्यक्ति की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस पूछताछ में बताया गया कि कथित ओझा ने उन्हें इस तरह का काम करने की सलाह दी थी। पुलिस के मुताबिक, मासूम को अमावस्या के दिन बलि चढ़ाने की योजना बनाई गई थी और इसके लिए आगामी एक-दो दिनों का समय तय किया गया था। यह खुलासा अपने आप में बेहद गंभीर है। जिस बच्चे को अभी ठीक से बोलना और दुनिया को पहचानना भी नहीं आता, उसे कथित तांत्रिक सलाह और अंधविश्वास के कारण मौत के लिए चुन लिया गया था। हालांकि, बलि की योजना और कथित ओझा की भूमिका फिलहाल पुलिस पूछताछ में सामने आए आरोप हैं। इन्हें न्यायालय में साबित होना अभी बाकी है।
महराजगंज पुलिस ने इस मामले में कुल तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस प्रेस नोट में उनकी पहचान इस प्रकार बताई गई है:
पुलिस के अनुसार, सावित्री और सरस्वती ने मिलकर अपहरण की योजना बनाई थी। करण कुमार गौतम भी इस साजिश में शामिल बताया गया है। पुलिस प्रेस नोट में करण को सावित्री का दूसरा पति बताया गया है। इन तीनों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश करने की कार्रवाई की जा रही है।
महराजगंज पुलिस की इस कार्रवाई में कई पुलिस इकाइयों ने मिलकर काम किया। पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने मासूम की सकुशल बरामदगी में शामिल पुलिस टीम के सराहनीय कार्य को देखते हुए 25,000 रुपये नगद पुरस्कार देने की घोषणा की है। इस ऑपरेशन में थाना ठूठीबारी पुलिस, एसओजी, स्वाट, सर्विलांस टीम और डॉग ट्रैकर स्क्वायड की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस टीम में थानाध्यक्ष अमित कुमार सिंह, उपनिरीक्षक बृजेश पांडेय, आलोक कुमार राय, रमेश पुरी, दिनेश सिंह यादव, महिला उपनिरीक्षक प्रियंका मौर्य, कांस्टेबल बलवंत यादव, मृत्युंजय तिवारी, अरुण यादव, राजेश्वर मिश्रा और महिला कांस्टेबल प्राची वर्मा सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे। एसओजी प्रभारी योगेश कुमार सिंह, स्वाट प्रभारी उपनिरीक्षक आशीष कुमार सिंह तथा उनकी टीम ने भी इस ऑपरेशन में सहयोग किया। इसके अलावा सर्विलांस टीम और डॉग ट्रैकर स्क्वायड के खोजी कुत्ते विराट की सहायता ली गई।
इस पूरे मामले को देखें तो पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल अपहरणकर्ताओं को पकड़ना नहीं थी, बल्कि एक ऐसे मासूम की जान बचाना था, जिसके बारे में पुलिस को पता चला कि उसकी बलि देने की कथित योजना बनाई गई थी। अगर पुलिस को सीसीटीवी फुटेज से समय रहते महिला का सुराग नहीं मिलता, बस चालक से जानकारी नहीं मिलती और सर्विलांस के जरिए दिल्ली तक आरोपियों का पीछा नहीं किया जाता तो परिणाम बेहद भयावह हो सकता था। इसलिए इस मामले में पुलिस की जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसका समन्वित और समयबद्ध ऑपरेशन रहा। 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना, स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाना, तकनीकी साक्ष्यों का इस्तेमाल करना और दूसरे राज्य की राजधानी तक पहुंचकर बच्चे को बरामद करना इस ऑपरेशन के प्रमुख चरण रहे।
महराजगंज की यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं है। यह समाज के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है। आखिर कोई व्यक्ति किस हद तक अंधविश्वास में डूब सकता है कि उसे अपनी समस्याओं का समाधान किसी मासूम बच्चे की जान लेने में दिखाई देने लगे? भारत में आज भी कुछ लोग तंत्र-मंत्र, झाड़-फूंक और कथित चमत्कारों के नाम पर लोगों की मजबूरी और भावनाओं का फायदा उठाते हैं। परिवार में किसी की मृत्यु हो जाना, किसी का लापता हो जाना या जीवन में परेशानियां आना दुखद परिस्थितियां हैं, लेकिन इनका समाधान किसी निर्दोष की जिंदगी को खतरे में डालकर नहीं किया जा सकता। इस मामले में ओझा की भूमिका की भी गहराई से जांच जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति ने वास्तव में बलि देने के लिए उकसाया है तो उसके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।महराजगंज पुलिस के लिए अब आगे की जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित साजिश में नेपाल के बैरियहवा के झाड़-फूंक करने वाले व्यक्ति की वास्तविक भूमिका क्या थी और क्या इस तरह की किसी अन्य गतिविधि या साजिश के संकेत भी मिलते हैं।
महराजगंज के थाना ठूठीबारी में इस प्रकरण में मुकदमा अपराध संख्या 149/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस प्रेस नोट में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2), 140(4), 331(5) तथा किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) की धारा 80 का उल्लेख किया गया है। पुलिस के मुताबिक, बच्चे की सकुशल बरामदगी के बाद उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और उसे परिजनों को सौंप दिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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