बाबा टिकैत आज भी किसान राजनीति में उतने ही प्रासंगिक क्यों हैं ? क्यों अलग-अलग दलों के नेता भी उनकी विरासत को नमन करते हैं ? जानिए महेंद्र सिंह टिकैत की वह पूरी कहानी, जिसने उन्हें सिर्फ किसान नेता नहीं, बल्कि किसानों की बुलंद आवाज बना दिया।

UP News : भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक और किसानों की आवाज को देश की राजनीति के केंद्र तक पहुंचाने वाले महान किसान नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की 91वीं जयंती पर मंगलवार को देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। उत्तर प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक के अनेक प्रमुख नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से बाबा टिकैत को याद करते हुए उनके किसान हितों के लिए किए गए संघर्ष को नमन किया। चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। किसान नेता के प्रति राजनीतिक विचारधाराओं से अलग दिखाई दिया यह सम्मान उनकी व्यापक स्वीकार्यता को रेखांकित करता है। UP News
6 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती के अवसर पर लगातार श्रद्धांजलि संदेश सामने आए। भाजपा और विपक्ष के नेताओं ने अपने-अपने संदेशों के माध्यम से किसान नेता के संघर्ष, सादगी और किसानों के अधिकारों के लिए उनके योगदान को याद किया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से भी चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को जयंती पर याद किया गया। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी सोशल मीडिया पर बाबा टिकैत को श्रद्धांजलि अर्पित की। इनके अलावा विभिन्न किसान नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने भी टिकैत की किसान आंदोलन में भूमिका को याद किया। UP News
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत का जन्म 6 अक्टूबर 1935 को मुजफ्फरनगर के सिसौली गांव में हुआ था। उन्होंने किसानों की समस्याओं को केवल स्थानीय मुद्दा बनाकर नहीं छोड़ा, बल्कि उन्हें व्यापक किसान आंदोलनों का स्वरूप दिया। 1980 के दशक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से उठी किसान आंदोलनों की आवाज आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची। 1987 के करमूखेड़ी बिजलीघर आंदोलन के बाद चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की पहचान देशभर में तेजी से बनी। इसके बाद मेरठ, रजबपुर और दिल्ली के वोट क्लब सहित कई स्थानों पर किसानों के बड़े आंदोलन हुए। उनकी नेतृत्व शैली में किसानों की एकजुटता, पंचायत और सीधे संवाद को विशेष महत्व मिला। बाबा टिकैत किसानों की फसलों के उचित मूल्य, बिजली की दरों, कर्ज और कृषि से जुड़े दूसरे मुद्दों को लेकर लगातार सरकारों के सामने अपनी बात रखते रहे। यही कारण रहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गांवों से लेकर देश की राजधानी तक उनकी आवाज को गंभीरता से सुना जाता था। UP News
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती पर उनके पैतृक गांव सिसौली में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। किसान भवन में 4 से 6 अक्टूबर तक अखंड पाठ साहिब का आयोजन किया गया। भारतीय किसान यूनियन से जुड़े कार्यकर्ताओं और किसानों ने इस दौरान बाबा टिकैत को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में लंगर और अन्य धार्मिक आयोजन भी हुए। जयंती के अवसर पर बड़ी संख्या में किसानों के सिसौली पहुंचने की संभावना पहले ही जताई गई थी। UP News
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की 91वीं जयंती पर गौतमबुद्ध नगर में भी भारतीय किसान यूनियन से जुड़े किसानों और कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम आयोजित किए। हवन-पूजन और भंडारे के साथ किसानों ने बाबा टिकैत के संघर्ष को याद किया और किसान एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया। UP News
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि किसान हितों से जुड़े मुद्दों पर उनकी आवाज को अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के लोगों ने भी महत्व दिया। यही वजह है कि उनकी जयंती पर भाजपा से लेकर समाजवादी पार्टी और किसान संगठनों से जुड़े नेताओं तक ने उन्हें याद किया। आज उनके निधन के 15 वर्ष बाद भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान आंदोलनों और ग्रामीण राजनीति में उनकी विरासत स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उनकी सादगी, बेबाक अंदाज और किसानों के मुद्दों पर सरकारों से सीधे संवाद की शैली आज भी किसान नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत मानी जाती है। चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत का जीवन इस बात का उदाहरण है कि गांव की मिट्टी से उठी किसान की आवाज भी यदि संगठित और दृढ़ हो तो वह सत्ता के गलियारों तक अपनी पहुंच बना सकती है। यही कारण है कि 91वीं जयंती पर एक बार फिर सोशल मीडिया से लेकर किसान पंचायतों तक ‘बाबा टिकैत’ का नाम प्रमुखता से गूंजता दिखाई दिया। UP News
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