समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मानी जाने वाली मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में है।

UP News : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मानी जाने वाली मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए उनके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। प्रशासन का कहना है कि इन भवनों का निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे के किया गया, जबकि ट्रस्ट इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती देने की तैयारी में है।
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रामपुर विकास प्राधिकरण के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में बनी 38 इमारतों के निर्माण के लिए आवश्यक भवन मानचित्र (बिल्डिंग प्लान) की मंजूरी नहीं ली गई थी। जांच में पाया गया कि परिसर में केवल मेडिकल कॉलेज और एक अकादमिक ब्लॉक का नक्शा ही विधिवत स्वीकृत था, जबकि अन्य भवन बिना अनुमति के बनाए गए। इसी आधार पर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया है।
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प्रशासन की ओर से ट्रस्ट को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। यदि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो आगे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि ट्रस्ट के पास इस आदेश को अदालत में चुनौती देने का कानूनी विकल्प मौजूद है।
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जौहर यूनिवर्सिटी केवल अवैध निर्माण के आरोपों को लेकर ही नहीं, बल्कि निर्माण लागत को लेकर भी विवादों में है। आयकर विभाग का दावा है कि विश्वविद्यालय के निर्माण पर लगभग 496 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का कहना है कि कुल निर्माण लागत केवल 46 करोड़ रुपये रही। इसी अंतर को लेकर आयकर विभाग पहले भी ट्रस्ट को नोटिस जारी कर चुका है और फंडिंग के स्रोतों की जांच जारी है।
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मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने वर्ष 2006 में इस विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। बाद में यहां मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, कृषि संकाय, लाइब्रेरी, हॉस्टल और अन्य शैक्षणिक भवन बनाए गए। वर्ष 2012 में विश्वविद्यालय का औपचारिक उद्घाटन हुआ और बाद में इसे निजी विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। पिछले कुछ वर्षों में भूमि आवंटन, लीज, निर्माण स्वीकृति और वित्तीय मामलों को लेकर यह संस्थान कई कानूनी विवादों में रहा है।
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विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। यदि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ती है, तो कई शैक्षणिक विभाग, प्रयोगशालाएं और अन्य सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि अंतिम स्थिति अदालत के फैसले और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर निर्भर करेगी। फिलहाल छात्रों और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
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जौहर यूनिवर्सिटी का नाम पहले भी भूमि लीज, सरकारी नियमों के उल्लंघन और अन्य मामलों को लेकर सुर्खियों में रहा है। वर्ष 2024 में उच्च न्यायालय के फैसले के बाद विश्वविद्यालय से जुड़ी लीज विवाद में भी ट्रस्ट को झटका लगा था। अब 38 इमारतों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ने इस मामले को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।
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