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प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही बिजली कटौती अब अधिकारियों पर भारी पड़ने लगी है। राज्य सरकार ने बिजली व्यवस्था में लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के दो अधिशासी अभियंताओं को निलंबित कर दिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही बिजली कटौती अब अधिकारियों पर भारी पड़ने लगी है। राज्य सरकार ने बिजली व्यवस्था में लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के दो अधिशासी अभियंताओं को निलंबित कर दिया है। बिजली संकट से परेशान जनता लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है। कई जिलों में लोगों ने पावर हाउस का घेराव किया और सड़क पर उतरकर नाराजगी जताई। बढ़ते जनाक्रोश के बीच सरकार ने अब जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक मयूर माहेश्वरी ने कार्रवाई करते हुए अधिशासी अभियंता पारेषण गाजियाबाद राहुल को निलंबित कर दिया। इसके अलावा अधिशासी अभियंता पारेषण पश्चिम राहुल को मेरठ मुख्यालय से संबद्ध किया गया है, जबकि अधिशासी अभियंता पारेषण मेरठ योगेश कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई ट्रांसमिशन लाइनों में लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों और बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण की गई है।
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बीते कुछ दिनों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, खासकर मेरठ और गाजियाबाद क्षेत्र में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 19 मई को 132 केवी मोदीनगर-2 कंकरखेड़ा ट्रांसमिशन लाइन ट्रिप हो गई थी। जांच में सामने आया कि टावर संख्या 33 और 34 के बीच कंडक्टर टूट गया था। इसके अगले दिन 20 मई को 132 केवी मोदीनगर-2 बेदवापुर लाइन में भी तकनीकी खराबी आ गई। यहां टावर संख्या 8 और 9 के बीच मिड स्पैन ज्वाइंट से कंडक्टर टूटने और टावर के ऊपरी हिस्से को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई। इन तकनीकी गड़बड़ियों के कारण कई इलाकों में घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रही।
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भीषण गर्मी और लगातार बिजली कटौती से लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कई शहरों में नागरिकों ने बिजली विभाग के खिलाफ धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कुछ जगहों पर लोगों ने पावर हाउस का घेराव किया और अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों का कहना है कि गर्मी के इस दौर में घंटों बिजली कटौती ने जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बुजुर्ग, बच्चे और मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। वहीं लो-वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है।
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प्रदेश में बढ़ते बिजली संकट को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने शनिवार सुबह 10:30 बजे उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई है। बैठक में बिजली आपूर्ति, ट्रिपिंग, तकनीकी फॉल्ट और अधिकारियों की जवाबदेही पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही यह भी समीक्षा की जाएगी कि किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा समस्या आ रही है और उसे तत्काल कैसे दूर किया जाए।
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सरकार अब बिजली संकट को केवल तकनीकी समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही से भी जोड़कर देख रही है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई पर भी चर्चा हो सकती है। ऊर्जा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उत्तर प्रदेश में इस समय तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रांसमिशन नेटवर्क और स्थानीय बिजली व्यवस्था को समय रहते मजबूत नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है। फिलहाल सरकार जनता को राहत देने और बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए तेजी से कदम उठाने का दावा कर रही है।
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