श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े प्रमुख धार्मिक संगठन निर्मोही अखाड़े ने राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेन्द्र दास को अखाड़े के महंत पद से हटाने का फैसला लिया है।

UP News : श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े प्रमुख धार्मिक संगठन निर्मोही अखाड़े ने राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेन्द्र दास को अखाड़े के महंत पद से हटाने का फैसला लिया है। यह निर्णय 5 जुलाई को दिल्ली में आयोजित पंच रामानंदीय निर्मोही अखाड़े की बैठक में लिया गया। इस घटनाक्रम ने राम मंदिर ट्रस्ट और निर्मोही अखाड़े के संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है, क्योंकि दिनेन्द्र दास को ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व निर्मोही अखाड़े के महंत होने के आधार पर मिला था।
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निर्मोही अखाड़े की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका के अनुसार, 5 जुलाई को दिल्ली में अखाड़े के पंचों की बैठक हुई, जिसमें 13 सदस्य शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता महंत रामचंद्राचार्य ने की। इस दौरान पांच प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें एक प्रस्ताव महंत दिनेन्द्र दास को अखाड़े के महंत पद से हटाने से संबंधित था। बताया गया कि इस प्रस्ताव को आठ संतों के समर्थन से मंजूरी दी गई। UP News
महंत दिनेन्द्र दास श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य हैं। सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के बाद केंद्र सरकार द्वारा गठित ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को प्रतिनिधित्व दिया गया था। ऐसे में अखाड़े से हटाए जाने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वह आगे भी निर्मोही अखाड़े के प्रतिनिधि के रूप में ट्रस्ट में बने रहेंगे। इस संबंध में अभी तक ट्रस्ट या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
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इसी बीच निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग भी की है। याचिका में कहा गया है कि 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में अखाड़े को उचित प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई थी, लेकिन उसका पूर्ण पालन नहीं हुआ। अखाड़े ने अदालत से ट्रस्ट के पुनर्गठन और अपने अधिकारों की बहाली की मांग की है।
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महंत दिनेन्द्र दास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका या अपने खिलाफ लिए गए निर्णय की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में पूजा-पाठ रामानंदी परंपरा के अनुसार नियमित रूप से हो रहा है और श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि वह प्रतिदिन मंदिर जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हैं और चढ़ावे की गिनती व सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक मजबूत की गई है।
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महंत दिनेन्द्र दास का नाम हाल के दिनों में राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े विवाद के दौरान भी चर्चा में रहा था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे और कुछ अधिकारियों पर परंपराओं से हटकर काम करने के आरोप लगाए थे। अब निर्मोही अखाड़े के इस फैसले और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है।
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