सहारा शहर की जमीन पर विधानसभा निर्माण का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट में खारिज हुई अपील

उत्तर प्रदेश की राजधानी में नई विधानसभा के निर्माण को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट में सहारा हाउसिंग कंपनी की अपील खारिज होने के बाद अब सहारा शहर की जमीन पर विधानसभा बनाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

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सहारा शहर
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar19 Mar 2026 06:37 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी में नई विधानसभा के निर्माण को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट में सहारा हाउसिंग कंपनी की अपील खारिज होने के बाद अब सहारा शहर की जमीन पर विधानसभा बनाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

सहारा शहर खाली कर रहीं स्वप्ना राय

कोर्ट में हार के बाद सहारा प्रमुख दिवंगत सुब्रत राय की पत्नी स्वप्ना राय ने सहारा शहर खाली करना शुरू कर दिया है। परिसर से सामान हटाया जा रहा है। गाड़ियां, फर्नीचर और अन्य सामग्री बाहर ले जाई जा रही है। पशुओं को भी हटाने की प्रक्रिया जारी है। नगर निगम ने उन्हें सामान ले जाने की अनुमति दे दी है और अगले एक-दो दिनों में पूरा परिसर खाली होने की संभावना है।

लीज खत्म, नगर निगम ने लिया कब्जा

जानकारी के अनुसार सहारा शहर की लीज अवधि 30 साल पूरी हो चुकी थी। शर्तों के उल्लंघन के चलते लीज बढ़ाई नहीं गई। नगर निगम ने पहले ही जमीन पर कब्जा लेकर परिसर को सील कर दिया था। इसके बाद कंपनी ने पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में राहत की मांग की, लेकिन दोनों जगह से निराशा हाथ लगी।

170 एकड़ जमीन पर बन सकता है विधानसभा परिसर

नगर निगम के अनुसार यह करीब 170 एकड़ जमीन अब पूरी तरह विवाद मुक्त हो चुकी है। इस जमीन पर नई विधानसभा, मुख्यमंत्री सचिवालय तथा मुख्यमंत्री आवास जैसे बड़े प्रोजेक्ट विकसित किए जाने पर मंथन चल रहा है। अब तक यह पूरा मामला कोर्ट में लंबित होने के कारण निर्माण कार्य अटका हुआ था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सभी कानूनी बाधाएं समाप्त हो गई हैं। नगर आयुक्त के मुताबिक, जमीन पर क्या निर्माण होगा, इसका अंतिम फैसला राज्य सरकार और शासन स्तर पर लिया जाएगा। सहारा शहर की जमीन को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद खत्म होने के बाद अब लखनऊ में नई विधानसभा के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठता नजर आ रहा है। आने वाले समय में यह क्षेत्र प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।



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सपा सांसद धर्मेंद्र यादव को बड़ी राहत, एमपी-एमएलए कोर्ट ने किया बरी

समाजवादी पार्टी के आजमगढ़ से सांसद धर्मेंद्र यादव को आचार संहिता उल्लंघन के मामले में बड़ी राहत मिली है। बदायूं स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया है। इस मामले की सुनवाई एक दिन पहले पूरी हो चुकी थी, जिसके बाद गुरुवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।

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आजमगढ़ से सांसद धर्मेंद्र यादव
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar19 Mar 2026 06:16 PM
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UP News : समाजवादी पार्टी के आजमगढ़ से सांसद धर्मेंद्र यादव को आचार संहिता उल्लंघन के मामले में बड़ी राहत मिली है। बदायूं स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया है। इस मामले की सुनवाई एक दिन पहले पूरी हो चुकी थी, जिसके बाद गुरुवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। फैसले के दौरान धर्मेंद्र यादव खुद अदालत में मौजूद रहे और उन्होंने कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया।

2022 विधानसभा चुनाव से जुड़ा था मामला 

यह मामला वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान का है, जब चुनाव आचार संहिता लागू थी। तत्कालीन एसडीएम सुखलाल प्रसाद वर्मा ने केस दर्ज कराया था। आरोप था कि बिना अनुमति कार्यक्रम आयोजित किया गया। शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को बुलाकर वोट प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया गया था।

28 अन्य लोगों के साथ दाखिल हुई थी चार्जशीट

इस केस में सांसद के साथ कुल 28 अन्य लोगों के खिलाफ भी पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी। धर्मेंद्र यादव को गौरतलब है कि जून 2024 में भी इस मामले में राहत मिल चुकी थी। अब कोर्ट के ताजा फैसले के बाद उन्हें पूरी तरह से बरी कर दिया गया है। इस निर्णय से न केवल धर्मेंद्र यादव को कानूनी राहत मिली है, बल्कि राजनीतिक तौर पर भी यह उनके लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एमपी-एमएलए कोर्ट के इस फैसले के साथ ही लंबे समय से चल रहा यह मामला समाप्त हो गया है। अब यह निर्णय आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियों पर भी असर डाल सकता है।


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नोएडा लव जिहाद केस में पुलिस पर गिरी गाज, एसएचओ और एसआई सस्पेंड

उत्तर प्रदेश के नोएडा में कथित लव जिहाद मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आने के बाद बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया गया है। थाना स्तर पर गंभीर आरोपों के बावजूद हल्की धाराएं लगाने के चलते एसएचओ और एसआई को निलंबित कर दिया गया है, जबकि उच्च अधिकारियों से जवाब-तलब किया गया है।

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सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर थाने का घेराव किया
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar19 Mar 2026 04:57 PM
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Noida News : उत्तर प्रदेश के नोएडा में कथित लव जिहाद मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आने के बाद बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया गया है। थाना स्तर पर गंभीर आरोपों के बावजूद हल्की धाराएं लगाने के चलते एसएचओ और एसआई को निलंबित कर दिया गया है, जबकि उच्च अधिकारियों से जवाब-तलब किया गया है।

पहचान छिपाकर संबंध, फिर शोषण और ब्लैकमेलिंग के आरोप

मामला नोएडा के फेस-3 थाना क्षेत्र का है, जहां एक युवती ने आरोप लगाया कि एक बांग्लादेशी युवक ने अपनी पहचान और धर्म छिपाकर उससे संबंध बनाए। यवती ने बताया कि सोशल मीडिया के जरिए संपर्क हुआ था। प्रेम जाल में फंसाने का आरोप लगाते हुए यवती ने आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करके लाखों रुपये की ठगी करने का आरोप भी लगाया। पीड़िता का कहना है कि आरोपी ने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लगातार शोषण किया।

पुलिस पर आरोप : हल्की धाराओं में दर्ज की गई एफआईआर

पीड़िता द्वारा शिकायत के बावजूद पुलिस पर शुरुआत में मामले को गंभीरता से न लेने का आरोप लगा। बताया गया कि एफआईआर में कड़ी धाराएं नहीं लगाई गईं। मामले को दबाने की कोशिश की गई जिससे कार्रवाई में देरी हुई। यही वजह रही कि पुलिस के रवैये पर सवाल खड़े हुए।

थाने का घेराव, बढ़ा दबाव

जब कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़िता ने सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर थाने का घेराव किया। विरोध और हंगामे के बाद मामला तूल पकड़ गया, जिसके बाद उच्च अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। इसके बाद एसएचओ पुनीत कुमार और एसआई प्रीति गुप्ता निलंबित कर दी गर्इं। जांच में लापरवाही सामने आने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।

डीसीपी से मांगा गया स्पष्टीकरण

मामले की गंभीरता को देखते हुए शक्ति मोहन अवस्थी से भी जवाब मांगा गया है। जांच रिपोर्ट में यह तय किया जाएगा कि किस स्तर पर लापरवाही हुई और आगे किन अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। नोएडा का यह मामला एक बार फिर पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, प्रशासनिक कार्रवाई से यह संकेत जरूर मिला है कि लापरवाही पर अब सख्ती बरती जा रही है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और भी बड़े फैसले हो सकते हैं।