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कानपुर में एक आईटीबीपी जवान की मां के इलाज में हुई कथित गंभीर लापरवाही के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। शुरुआती जांच में क्लीन चिट पाने वाले दोनों अस्पतालों को अब दोबारा जांच के बाद दोषी पाया गया है।

UP News : कानपुर में एक आईटीबीपी जवान की मां के इलाज में हुई कथित गंभीर लापरवाही के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। शुरुआती जांच में क्लीन चिट पाने वाले दोनों अस्पतालों को अब दोबारा जांच के बाद दोषी पाया गया है। इसके बाद पुलिस ने दोनों अस्पतालों के प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी है। यह मामला आईटीबीपी के जवान से जुड़ा है, जिनकी मां को इलाज के दौरान गंभीर स्थिति में अपना हाथ गंवाना पड़ा था।
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जानकारी के अनुसार, पीड़ित मां को सांस लेने में दिक्कत होने पर पहले कानपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां से स्थिति बिगड़ने पर उन्हें दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया। दूसरे अस्पताल में हालत गंभीर बताकर डॉक्टरों ने संक्रमण (इंफेक्शन) के चलते दाहिना हाथ काटने का निर्णय लिया।
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मामले के तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच कराई गई थी, जिसमें दोनों अस्पतालों को क्लीन चिट दे दी गई थी।
लेकिन यह रिपोर्ट सामने आते ही पीड़ित परिवार ने आपत्ति जताई और मामले को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया। मामले में नया मोड़ तब आया जब आईटीबीपी के कमांडेंट ने खुद हस्तक्षेप किया और दोबारा जांच की मांग की। इसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के स्तर पर एक नई जांच टीम गठित की गई, जिसने दोनों अस्पतालों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए और उन्हें लापरवाही का दोषी पाया।
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दोबारा जांच रिपोर्ट में कानपुर के कृष्णा अस्पताल और पारस अस्पताल को इलाज में लापरवाही का जिम्मेदार माना गया है। रिपोर्ट में यह संकेत दिए गए कि मरीज की स्थिति के प्रबंधन में गंभीर चूक हुई, जिसके चलते हालात बिगड़े। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कानपुर पुलिस कमिश्नर ने दोनों अस्पतालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अब पुलिस अस्पताल प्रबंधन, जिम्मेदार डॉक्टरों और स्टाफ की भूमिका की विस्तृत जांच करेगी।
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इस पूरे विवाद के दौरान मामला उस समय और गरमा गया जब आईटीबीपी के जवान अपने अधिकारियों के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। उस दौरान स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए, हालांकि बाद में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल बातचीत और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया थी।
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पीड़ित परिवार का कहना है कि लंबे समय से वे न्याय की मांग कर रहे थे। शुरुआत में मिली क्लीन चिट से वे निराश थे, लेकिन अब दोबारा जांच में आए फैसले से उन्हें राहत मिली है। अब पुलिस की एफआईआर और आगे की जांच पर सबकी नजर है। यह देखना अहम होगा कि क्या इस मामले में मेडिकल लापरवाही के तहत सख्त कार्रवाई होती है या जांच किसी और दिशा में जाती है।
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