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प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में अदालत ने आठ साल पुराने राजेंद्र सैनी हत्याकांड में अहम फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है।

UP News : उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में अदालत ने आठ साल पुराने राजेंद्र सैनी हत्याकांड में अहम फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए बड़ी न्यायिक राहत माना जा रहा है। यह मामला वर्ष 2018 का है, जब मीरापुर थाना क्षेत्र के खेड़ी गांव के जंगल में एक युवक का जला हुआ शव बरामद हुआ था। बाद में उसकी पहचान ककरौली निवासी 26 वर्षीय राजेंद्र सैनी के रूप में हुई थी।
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अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के अनुसार, 4 जून 2018 को आरोपी राजेंद्र सैनी को बाइक पर अपने साथ ले गए थे। इसके बाद उसे शराब पिलाई गई और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी गई। हत्या के बाद सबूत छिपाने के उद्देश्य से शव को जंगल में ले जाकर जला दिया गया था। जांच में सामने आया कि इस वारदात के पीछे अवैध संबंधों के शक को कारण माना गया था।
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इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों-वीरसैन, गजेंद्र उर्फ गीलू और राम किरण उर्फ सावन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। ट्रायल के दौरान एक आरोपी वीरसैन की मृत्यु हो गई, जबकि शेष दो के खिलाफ मुकदमा जारी रहा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या-03) रवि कुमार दिवाकर ने सुनवाई के बाद गजेंद्र उर्फ गीलू और राम किरण उर्फ सावन को दोषी करार देते हुए उन्हें फांसी की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अपराध करने वालों में कानून का भय होना आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया कि गंभीर अपराधों में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती।
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सरकारी अधिवक्ता कुलदीप सिंह के अनुसार यह मामला लंबे समय तक अदालत में चला और अंतत: पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। आठ वर्षों की कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को न्याय व्यवस्था की मजबूती के रूप में देखा जा रहा है। मुजफ्फरनगर का यह फैसला न केवल एक पुराने जघन्य अपराध में न्याय की मिसाल है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कानून की पकड़ से कोई भी आरोपी लंबे समय तक बच नहीं सकता।
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