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प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शुमार किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) इन दिनों गंभीर आरोपों और प्रशासनिक जांचों के केंद्र में है।

UP News : प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शुमार किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) इन दिनों गंभीर आरोपों और प्रशासनिक जांचों के केंद्र में है। मरीजों के इलाज, सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और महंगी दवाओं की खरीद-फरोख्त से जुड़े कई मामलों ने संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेत्र रोग विभाग में बाहरी दवाएं लिखने, कार्डियोलॉजी विभाग में जरूरत से ज्यादा स्टेंट लगाने और यूरोलॉजी विभाग में करोड़ों रुपये की कैंसर दवाओं के कथित दुरुपयोग के मामलों के सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई डॉक्टरों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि सात विभागों में विशेष आॅडिट शुरू कर दिया गया है।
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सबसे पहले नेत्र रोग विभाग में मरीजों को अस्पताल के बजाय बाहर से दवाएं, लेंस और चिकित्सा उपकरण खरीदने के लिए मजबूर किए जाने का मामला सामने आया। जांच में कई मरीजों ने आरोप लगाया कि आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ मिलने के बावजूद उनसे निजी खर्च करवाया गया। जांच समिति के समक्ष दर्ज बयानों में मरीजों ने बताया कि उन्हें एक निश्चित मेडिकल स्टोर से दवाएं और लेंस खरीदने के लिए कहा जाता था। कुछ मरीजों ने यह भी आरोप लगाया कि उपचार और आॅपरेशन के नाम पर उनसे हजारों रुपये खर्च करवाए गए। मामले की जांच के बाद प्रशासन ने विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता को निलंबित कर दिया है। वहीं विभागाध्यक्ष डॉ. अपजीत कौर से भी जवाब मांगा गया है। जांच में एक बाहरी व्यक्ति की भूमिका भी सामने आई है, जिसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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जांच के दौरान सामने आए कुछ मामलों ने प्रशासन को भी चौंका दिया। एक मरीज ने आरोप लगाया कि गलत रिपोर्ट दिखाकर आॅपरेशन का दबाव बनाया गया और उपचार के नाम पर बड़ी रकम खर्च करवाई गई। वहीं दूसरे मरीज ने दावा किया कि लेंस लगाने के लिए पैसे लिए गए, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। इन शिकायतों के बाद गठित जांच समिति ने कई मरीजों के बयान दर्ज किए और उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की। केजीएमयू के कार्डियोलॉजी विभाग में एक मरीज को पांच स्टेंट लगाए जाने का मामला भी चर्चा का विषय बना हुआ है। सबसे गंभीर मामला यूरोलॉजी विभाग से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच में आरोप सामने आए हैं कि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली महंगी कैंसर दवाओं के वितरण में बड़ी अनियमितताएं हुईं।
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यूरोलॉजी विभाग के मामले के बाद केजीएमयू प्रशासन ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। कैंसर और गंभीर रोगों से जुड़े सात विभागों में दवा खरीद, स्टॉक, वितरण और भुगतान प्रक्रिया की विशेष आॅडिट शुरू कर दी गई है। आॅडिट के दौरान मरीजों के रिकॉर्ड, दवा खरीद से जुड़े बिल, भुगतान दस्तावेज और स्टॉक रजिस्टर की बारीकी से जांच की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं सरकारी योजनाओं और मरीजों के नाम पर किसी तरह की वित्तीय या प्रशासनिक गड़बड़ी तो नहीं हुई।
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