प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अब प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं रहेगा। नए नियमों के तहत स्मार्ट मीटर तो लगाए जाएंगे, लेकिन वे प्रीपेड होंगे या पोस्टपेड इसका फैसला उपभोक्ता खुद करेंगे।

UP News : उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अब प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं रहेगा। नए नियमों के तहत स्मार्ट मीटर तो लगाए जाएंगे, लेकिन वे प्रीपेड होंगे या पोस्टपेड इसका फैसला उपभोक्ता खुद करेंगे।
यह फैसला केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा जारी संशोधित आदेश के बाद लागू हुआ है।
नए आदेश के मुताबिक:
* जहां संचार नेटवर्क उपलब्ध है, वहां स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे
* लेकिन प्रीपेड मोड अब अनिवार्य नहीं रहेगा
* उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुन सकेंगे।
इस बदलाव से लाखों लोगों को राहत मिली है, जो प्रीपेड सिस्टम की समस्याओं से जूझ रहे थे।
पिछले कुछ समय से उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं:
* बार-बार बिजली रिचार्ज की जरूरत
* तकनीकी गड़बड़ियां और बैलेंस कटने की समस्या
* अचानक बिजली कटने की शिकायत।
इन समस्याओं के कारण प्रीपेड मीटर को लेकर व्यापक असंतोष था।
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार:
* प्रदेश में 78 लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं
* इनमें से करीब 70 लाख प्रीपेड मीटर हैं।
अब तक नए कनेक्शनों पर प्रीपेड मीटर अनिवार्य रूप से लगाए जा रहे थे, जिसे लेकर विरोध भी हो रहा था।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने संसद में स्पष्ट किया था कि प्रीपेड मीटर लगाना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा था कि यह पूरी तरह उपभोक्ताओं की इच्छा पर निर्भर होना चाहिए, जिसके बाद अब नियमों में बदलाव किया गया है। यह संशोधन विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत किया गया है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने अपने पुराने आदेश में बदलाव करते हुए प्रीपेड अनिवार्यता को हटा दिया है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद लंबे समय से इस अनिवार्यता का विरोध कर रही थी। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस फैसले को उपभोक्ताओं की बड़ी जीत बताया है। इसका असर यह होगा:
* उपभोक्ताओं को अब ज्यादा स्वतंत्रता और सुविधा मिलेगी
* बिजली विभाग और उपभोक्ताओं के बीच विश्वास बढ़ेगा
* प्रीपेड सिस्टम की समस्याओं से राहत मिलेगी।
यूपी में प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता खत्म होना एक बड़ा नीतिगत बदलाव है। इससे लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिली है और अब वे अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार मीटर का विकल्प चुन सकेंगे।