बिजनौर के अफजलगढ़ थाना क्षेत्र के कादराबाद में आम के हरे-भरे पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद सामने आया है। कृष्ण मंदिर के पास स्थित विशाल आम के बाग में बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने का ग्रामीणों ने आरोप लगाया है

UP News : उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में आम के हरे-भरे पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अफजलगढ़ थाना क्षेत्र के कादराबाद में कृष्ण मंदिर के पास स्थित विशाल आम के बाग में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की बात सामने आई है। ग्रामीणों का दावा है कि बाग में 300 से अधिक फलदार आम के पेड़ काट दिए गए हैं। वहीं, वन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी का कहना है कि 180 पेड़ों की कटाई की अनुमति है। पेड़ों की संख्या को लेकर सामने आए इस अंतर ने पूरे मामले को सवालों के घेरे में ला दिया है। कादराबाद इलाके में कृष्ण मंदिर के पास लंबे समय से आम का एक बड़ा और फलदार बाग मौजूद था। ग्रामीणों के मुताबिक, बाग में आम के सैकड़ों हरे पेड़ खड़े थे। आरोप है कि बीते दिनों इन पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई कर दी गई। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि बाग में 300 से अधिक आम के पेड़ काटे गए हैं। पेड़ों की कटाई के बाद वहां का नजारा बदल गया है। ग्रामीणों ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। हालांकि, वन क्षेत्रीय अधिकारी नगीना प्रदीप कुमार के अनुसार 180 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है। ऐसे में अनुमति प्राप्त पेड़ों की संख्या और ग्रामीणों द्वारा बताए जा रहे पेड़ों की संख्या में अंतर मामले की जांच का अहम बिंदु बन गया है।
ग्रामीणों ने पेड़ों की कटाई को लेकर भूमाफियाओं और लकड़ी ठेकेदारों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कथित मिलीभगत के चलते इलाके में पेड़ों की कटाई का काम जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पेड़ काटने के बाद उनकी लकड़ी को दूसरे स्थानों तक पहुंचाने के लिए तेज रफ्तार ट्रैक्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में वन विभाग और प्रशासन की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। UP News :
ग्रामीणों का कहना है कि आम के पेड़ केवल लकड़ी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण से भी जुड़े हैं। फलदार पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई से स्थानीय हरियाली और पर्यावरण पर असर पड़ने की चिंता जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिना पर्याप्त निगरानी के पेड़ों की कटाई जारी रही तो इसका असर आने वाले समय में दिखाई देगा। उनका कहना है कि विकास और जरूरत के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को रोकने के लिए प्रशासन को प्रभावी कदम उठाने चाहिए। पेड़ों की कटाई को लेकर ग्रामीण अब प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए और अवैध रूप से काटी गई लकड़ी को जब्त किया जाना चाहिए।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वास्तव में कितने पेड़ काटे गए और इनमें से कितने पेड़ों की वैध अनुमति थी। वन विभाग द्वारा बताई गई 180 पेड़ों की अनुमति और ग्रामीणों के 300 से अधिक पेड़ काटे जाने के दावे के बीच का अंतर जांच के बाद ही साफ हो सकेगा। UP News :
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