कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से मनुस्मृति को लेकर दिए गए बयान पर प्रयागराज समेत संत समाज में नाराजगी देखने को मिल रही है। साधु-संतों ने राहुल गांधी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि धार्मिक ग्रंथों को राजनीतिक बहस का विषय बनाने के बजाय उनके संदर्भ और मूल भाव को समझना चाहिए।

UP News : कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से मनुस्मृति को लेकर दिए गए बयान पर प्रयागराज समेत संत समाज में नाराजगी देखने को मिल रही है। साधु-संतों ने राहुल गांधी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि धार्मिक ग्रंथों को राजनीतिक बहस का विषय बनाने के बजाय उनके संदर्भ और मूल भाव को समझना चाहिए। संत समाज अब लोगों, खासकर युवा पीढ़ी को मनुस्मृति के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की बात कर रहा है। राहुल गांधी ने पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए महिलाओं से जुड़े कुछ प्रावधानों की आलोचना की थी। उनके बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। प्रयागराज और अन्य क्षेत्रों से जुड़े साधु-संतों का कहना है कि किसी भी प्राचीन ग्रंथ को समझने के लिए उसे उसके ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ में देखना जरूरी है। UP News
राहुल गांधी के बयान को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से जुड़े संतों ने नाराजगी जताई है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मां मनसा देवी मंदिर के प्रमुख महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक ग्रंथों को विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है। उनका कहना है कि मनुस्मृति को लेकर लोगों के बीच अलग-अलग मत और व्याख्याएं हो सकती हैं, लेकिन किसी ग्रंथ के चुनिंदा अंशों के आधार पर उसकी पूरी व्याख्या करना सही नहीं माना जा सकता। संत समाज का कहना है कि लोगों को इसके संदर्भ और विभिन्न व्याख्याओं की जानकारी दी जानी चाहिए। UP News
महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि धार्मिक कथावाचकों और संतों से आग्रह किया जा रहा है कि वे अपने प्रवचनों के दौरान लोगों को मनुस्मृति के संदर्भ और उसके विभिन्न पहलुओं की जानकारी दें। उनका कहना है कि सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानों के आधार पर युवाओं को किसी धार्मिक ग्रंथ के बारे में राय बनाने से बचना चाहिए। संत समाज का मानना है कि भारत की प्राचीन परंपराओं और धार्मिक ग्रंथों को समझने के लिए सही स्रोतों और व्यापक अध्ययन की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से श्रद्धालुओं और युवाओं के बीच जागरूकता बढ़ाने की बात कही जा रही है। UP News
अमेठी के टिकरमाफी आश्रम और अन्य धार्मिक संतों ने भी इस बहस के बीच युवाओं को भारतीय परंपराओं और धार्मिक साहित्य की सही जानकारी देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि धार्मिक ग्रंथों को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उनके मूल पाठ, ऐतिहासिक संदर्भ और अलग-अलग विद्वानों की व्याख्याओं को समझना जरूरी है। संतों ने नेताओं से भी जनहित और नीतिगत मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है। UP News
राहुल गांधी ने पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की सामाजिक स्थिति और उनकी स्वतंत्र पहचान को लेकर अपनी बात रखी थी। इस दौरान उन्होंने मनुस्मृति के कुछ अंशों का उल्लेख करते हुए उन्हें महिला विरोधी बताया था। राहुल गांधी ने कहा था कि महिलाओं की पहचान केवल बेटी, पत्नी या मां के रूप में सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने महिलाओं की स्वतंत्रता और समान अधिकारों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। साथ ही उन्होंने महिलाओं से जुड़े मनुस्मृति के कुछ प्रावधानों की आलोचना की। UP News
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