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उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले से शनिवार तड़के एक बेहद संवेदनशील और बड़ी खबर सामने आई है। कोसीकलां क्षेत्र में गोरक्षा गतिविधियों से जुड़े संत बाबा चंद्रशेखर, जिन्हें स्थानीय लोग फरसा वाले बाबा के नाम से जानते थे, संदिग्ध परिस्थितियों में वाहन की चपेट में आकर मौत का शिकार हो गए।

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UP News : उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले से शनिवार तड़के एक बेहद संवेदनशील और बड़ी खबर सामने आई है। कोसीकलां क्षेत्र में गोरक्षा गतिविधियों से जुड़े संत बाबा चंद्रशेखर, जिन्हें स्थानीय लोग फरसा वाले बाबा के नाम से जानते थे, संदिग्ध परिस्थितियों में वाहन की चपेट में आकर मौत का शिकार हो गए। घटना के बाद उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में माहौल अचानक गर्मा गया और बाबा के समर्थकों ने इस मौत को सामान्य हादसा मानने से इनकार कर दिया। गोरक्षक समूहों का आरोप है कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या है। बाबा की मौत की सूचना फैलते ही उत्तर प्रदेश के मथुरा, कोसीकलां और आसपास के इलाकों में आक्रोश की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में गोरक्षक और हिंदू संगठनों से जुड़े लोग सड़क पर उतर आए। विरोध इतना तेज हुआ कि दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-19) पर जाम की स्थिति बन गई। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, अवैध गतिविधियों और गोरक्षा से जुड़े विवादों को बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के मथुरा में शनिवार तड़के करीब चार बजे बाबा चंद्रशेखर को सूचना मिली थी कि कुछ लोग गोवंश को लेकर भाग रहे हैं। बताया जा रहा है कि सूचना मिलते ही बाबा बिना देर किए अपनी बाइक से मौके की ओर रवाना हो गए और कथित तौर पर संबंधित वाहन का पीछा शुरू कर दिया। घटना कोटवन चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नवीपुर गांव के पास हुई बताई जा रही है। आरोप है कि पीछा किए जाने के दौरान आरोपियों ने पहले बाबा की बाइक को जोरदार टक्कर मारी और फिर वाहन उन्हें कुचलते हुए निकल गया। टक्कर इतनी भीषण बताई जा रही है कि बाबा ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। इस घटना ने उत्तर प्रदेश के मथुरा में गहरा सनसनीखेज माहौल पैदा कर दिया। बाबा चंद्रशेखर की मौत के बाद उत्तर प्रदेश के मथुरा में उनके समर्थकों का गुस्सा खुलकर सामने आया। गोरक्षक संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा लंबे समय से गोवंश की रक्षा के लिए सक्रिय थे और इसी कारण उन्हें निशाना बनाया गया। समर्थकों ने साफ कहा कि यह कोई सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, पुलिस की ओर से अभी आधिकारिक तौर पर जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचा जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। फिर भी, उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में लोगों के बीच इस घटना को लेकर भारी भावनात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। घटना के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों और गोरक्षकों ने एक युवक को पकड़ लिया। बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं, इस प्रकरण में तीन अन्य लोगों के फरार होने की बात कही जा रही है। उत्तर प्रदेश पुलिस फरार संदिग्धों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा। साथ ही, जांच को निष्पक्ष रखने के लिए घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और तकनीकी तथ्यों को भी खंगाला जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मथुरा में यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि संवेदनशील सामाजिक प्रतिक्रिया का भी केंद्र बन गया है।
बाबा की मौत की खबर जैसे ही फैली, उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग कोसीकलां और हाईवे की ओर बढ़ने लगे। कुछ ही देर में सैकड़ों की संख्या में गौ-भक्त और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता NH-19 पर जुट गए। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली-आगरा हाईवे पर जाम लगा दिया, जिससे लंबी दूरी तक वाहनों की कतारें लग गईं और यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए, जब भीड़ के एक हिस्से की ओर से पथराव की सूचना सामने आई। इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी जैसे हालात बन गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ पीएसी की अतिरिक्त तैनाती करनी पड़ी। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर लगातार लोगों से संयम बरतने और हालात सामान्य बनाए रखने की अपील करते रहे।
बाबा चंद्रशेखर के निधन की खबर से उत्तर प्रदेश के मथुरा समेत पूरे ब्रज क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए लाए जाने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, गोरक्षक, संत समाज के लोग और समर्थक वहां पहुंचने लगे। माहौल भावुक भी था और आक्रोश से भरा हुआ भी। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा चंद्रशेखर को उनकी निडरता, स्पष्ट बोलने के अंदाज और गोसेवा के प्रति समर्पण के लिए जाना जाता था। ग्रामीणों का दावा है कि बाबा हमेशा गोवंश की रक्षा के मुद्दे पर सबसे आगे खड़े दिखाई देते थे। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के इस हिस्से में उनकी मौत को केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि एक सक्रिय और प्रभावशाली सामाजिक चेहरे की क्षति के रूप में देखा जा रहा है। UP News
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