मथुरा जंक्शन के प्रतीक्षालय में बुधवार दोपहर छत का बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर गया। हादसे के वक्त वहां दर्जनों यात्री मौजूद थे। गनीमत रही कि कोई घायल नहीं हुआ। रेलवे ने प्रभावित हिस्से को बंद कर स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की बात कही है।

UP News : उत्तर प्रदेश के मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन पर बुधवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब प्रतीक्षालय की छत से प्लास्टर का बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा। जिस समय यह घटना हुई, उस वक्त प्रतीक्षालय में बड़ी संख्या में यात्री मौजूद थे और अपनी ट्रेनों का इंतजार कर रहे थे। गनीमत रही कि प्लास्टर का मलबा किसी यात्री के ऊपर नहीं गिरा और बड़ा हादसा टल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घटना दोपहर करीब 12:30 बजे की बताई जा रही है। मथुरा जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 के पास बने प्रतीक्षालय में उस समय यात्रियों की काफी भीड़ थी। दिल्ली, आगरा और भरतपुर की ओर जाने वाली ट्रेनों का इंतजार कर रहे यात्री बेंचों पर बैठे थे, जबकि कुछ यात्री जमीन पर आराम कर रहे थे।
इसी दौरान अचानक छत के एक हिस्से से दरकने की आवाज आई। इससे पहले कि यात्री कुछ समझ पाते, सीमेंट और प्लास्टर का बड़ा हिस्सा तेज आवाज के साथ नीचे आ गिरा। प्लास्टर का मलबा उन बेंचों के आसपास गिरा, जहां कुछ समय पहले तक यात्री बैठे हुए थे। तेज आवाज सुनकर प्रतीक्षालय में मौजूद यात्रियों के बीच दहशत फैल गई। कई यात्री अपनी जान बचाने के लिए तुरंत वहां से बाहर की ओर भागे। कुछ देर तक स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
घटना के तुरंत बाद यात्रियों ने इसकी जानकारी ड्यूटी पर मौजूद रेलवे पुलिस और स्टेशन अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी और आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने तत्काल मलबा हटवाया और एहतियात के तौर पर प्रतीक्षालय के प्रभावित हिस्से को रस्सी लगाकर बंद कर दिया। यात्रियों को उस हिस्से में जाने से रोक दिया गया, ताकि किसी तरह की दूसरी दुर्घटना न हो।
घटना के बाद यात्रियों ने रेलवे स्टेशन के रखरखाव को लेकर सवाल खड़े किए हैं। यात्रियों का कहना है कि मथुरा जंक्शन उत्तर प्रदेश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में शामिल है और यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और आम यात्री पहुंचते हैं। ऐसे में प्रतीक्षालय जैसी जगह पर इस तरह प्लास्टर गिरना गंभीर चिंता का विषय है। यात्रियों के मुताबिक, स्टेशन की कई जगहों पर सीलन और दीवारों में दरारें दिखाई देती हैं। उनका कहना है कि जिन स्थानों पर बड़ी संख्या में यात्री हर समय मौजूद रहते हैं, वहां भवन की नियमित जांच और समय पर मरम्मत बेहद जरूरी है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में छत में सीलन के कारण प्लास्टर कमजोर होने की बात सामने आई है। हालांकि घटना की विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। अधिकारियों ने पूरे भवन का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की बात कही है। इससे यह पता लगाया जाएगा कि भवन की संरचना कितनी सुरक्षित है और किन हिस्सों में तत्काल मरम्मत की जरूरत है। फिलहाल प्रभावित हिस्से को यात्रियों की आवाजाही से दूर कर दिया गया है। राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है।
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