मथुरा के कुरकुंदा गांव में 17 वर्षीय दो दोस्तों सूरज और अंशु की सड़क हादसे में मौत से शोक की लहर है। दोनों की अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार एक साथ हुआ।

UP News : उत्तर प्रदेश के मथुरा से सामने आई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। कुरकुंदा गांव के रहने वाले 17 वर्षीय सूरज और 17 वर्षीय अंशु की दोस्ती पूरे गांव में जिगरी यारों के रूप में जानी जाती थी। दोनों बचपन से साथ खेलते, घूमते और हर सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़े रहते थे। लेकिन एक सड़क हादसे ने महज 17 साल की उम्र में दोनों दोस्तों को हमेशा के लिए एक-दूसरे से छीन लिया। सबसे हृदयविदारक दृश्य उस समय सामने आया, जब रविवार को दोनों दोस्तों की अर्थियां एक साथ गांव से उठीं। जिस गांव ने दोनों को हमेशा साथ देखा था, उसी गांव ने दोनों की अंतिम यात्रा भी एक साथ देखी। एक साथ उठती अर्थियों को देखकर परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम यात्रा में शामिल हुए और दोनों का अंतिम संस्कार भी एक साथ किया गया। UP News :
जानकारी के मुताबिक शनिवार शाम सूरज और अंशु पल्सर बाइक से घर का सामान लेने बरारी गए थे। सामान लेकर दोनों वापस कुरकुंदा लौट रहे थे। इसी दौरान रिफाइनरी थाना क्षेत्र में दिल्ली-आगरा हाईवे पर बरारी गांव के पास यह दर्दनाक हादसा हो गया। बताया गया है कि अंबेडकर पार्क के समीप सड़क किनारे एक गैस कैप्सूल ट्रक खड़ा था। लौटते समय दोनों दोस्तों की बाइक पीछे से इसी ट्रक में जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। राहगीरों ने तत्काल दोनों किशोरों को बाइक से निकालकर अस्पताल पहुंचाया। परिजनों को जैसे ही हादसे की जानकारी मिली, वे भी अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। चिकित्सकों ने उपचार के दौरान दोनों को मृत घोषित कर दिया। दो किशोरों की एक साथ मौत की खबर जैसे ही कुरकुंदा गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। देखते ही देखते दो परिवारों की खुशियां मातम में बदल गईं।
सूरज और अंशु की दोस्ती सामान्य दोस्ती नहीं थी। दोनों बचपन से एक-दूसरे के बेहद करीब थे। गांव के लोग उन्हें जिगरी दोस्त के रूप में जानते थे। साथ खेलना, साथ घूमना और रोजमर्रा के कामों में एक-दूसरे के साथ रहना उनकी जिंदगी का हिस्सा था। किसी ने शायद कल्पना भी नहीं की होगी कि जिस दोस्ती की गांव में मिसाल दी जाती थी, एक दिन उसी दोस्ती की अंतिम तस्वीर दोनों की एक साथ उठती अर्थियों के रूप में सामने आएगी।
रविवार को जब सूरज और अंशु की अर्थियां एक साथ उठीं तो कुरकुंदा गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। परिजन अपने बच्चों के शव देखकर बदहवास हो गए। महिलाओं की चीख-पुकार और परिजनों के विलाप ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। बड़ी संख्या में ग्रामीण दोनों दोस्तों की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। दोनों का अंतिम संस्कार भी एक साथ किया गया। जिस गांव में कुछ घंटे पहले तक दोनों किशोरों की मौत की चर्चा थी, वहां रविवार को हर तरफ सिर्फ मातम दिखाई दे रहा था। हादसे के बाद सड़क किनारे खड़े गैस कैप्सूल ट्रक को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिफाइनरी थाना प्रभारी अजय कौशल के अनुसार दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं। पुलिस हादसे की परिस्थितियों और सड़क किनारे खड़े ट्रक के संबंध में जांच कर रही है। प्रार्थना पत्र मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। UP News :
सूरज और अंशु की मौत ने दो परिवारों को ऐसा दर्द दिया है, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकती। 17 साल की उम्र जिंदगी के सपने देखने और भविष्य बनाने की उम्र होती है, लेकिन एक सड़क हादसे ने दोनों दोस्तों की जिंदगी के साथ उनके परिवारों के सपने भी छीन लिए। मथुरा के कुरकुंदा गांव में अब सूरज और अंशु की दोस्ती की यादें ही रह गई हैं। दोनों दोस्तों का एक साथ दुनिया से जाना और फिर एक साथ उनकी अर्थियों का उठना पूरे गांव के लिए ऐसा दुखद मंजर बन गया, जिसे शायद ही कोई कभी भूल पाए।
यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था, उनकी दृश्यता और हाईवे पर ऐसे वाहनों की पार्किंग को लेकर जिम्मेदार एजेंसियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। UP News :
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