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Mathura Vrindavan Travel Guide: माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था और उनका बचपन तथा रासलीलाएं वृंदावन की धरती पर बीती थीं। यही कारण है कि हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

Mathura Tourist Places: भारत में कई धार्मिक और ऐतिहासिक शहर हैं लेकिन मथुरा और वृंदावन का नाम आते ही मन में एक अलग ही भाव जाग उठता है। यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि आस्था, प्रेम और भक्ति का ऐसा संसार है जहां पहुंचकर लोगों को एक अनोखी शांति का अनुभव होता है। माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था और उनका बचपन तथा रासलीलाएं वृंदावन की धरती पर बीती थीं। यही कारण है कि हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। अगर आप भी मथुरा-वृंदावन घूमने का प्लान बना रहे हैं तो यह ट्रैवल गाइड आपकी यात्रा को आसान और यादगार बना सकता है।
मथुरा पहुंचने के बाद सबसे पहले श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर जाना चाहिए। यह वही स्थान माना जाता है जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तिमय माहौल महसूस होने लगता है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहती है इसलिए मोबाइल, कैमरा और अन्य सामान से जुड़े नियमों की जानकारी पहले ही ले लें। यहां दर्शन करने के बाद आसपास मौजूद कई छोटे-बड़े मंदिर भी देखे जा सकते हैं जो इस क्षेत्र की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाते हैं।
मथुरा का द्वारिकाधीश मंदिर अपने सुंदर स्थापत्य और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की सजावट और यहां होने वाली आरती श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। खासतौर पर जन्माष्टमी और होली के दौरान यहां का माहौल देखने लायक होता है। सुबह और शाम की आरती में शामिल होना एक अलग ही अनुभव देता है जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
मथुरा से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित वृंदावन अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। यहां की संकरी गलियां, मंदिरों की घंटियां और हर तरफ गूंजते राधे-राधे के स्वर वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना देते हैं। वृंदावन की सबसे खास बात यह है कि यहां आने वाला हर व्यक्ति खुद को भगवान कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ महसूस करता है।
वृंदावन का सबसे प्रसिद्ध मंदिर बांके बिहारी मंदिर है। यहां भगवान कृष्ण के बांके बिहारी स्वरूप के दर्शन के लिए रोज हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर की एक खास परंपरा है कि यहां भगवान के दर्शन लगातार नहीं होते बल्कि कुछ सेकंड के अंतराल पर पर्दा खोला और बंद किया जाता है। यही अनोखी परंपरा इस मंदिर को अन्य मंदिरों से अलग बनाती है और श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र भी।
अगर आप शाम के समय वृंदावन में हैं तो प्रेम मंदिर जरूर जाएं। सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर अपनी भव्यता और खूबसूरत लाइटिंग के लिए मशहूर है। शाम ढलते ही मंदिर रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठता है और पूरा परिसर किसी सपने जैसा दिखाई देता है। यहां भगवान कृष्ण और राधा की लीलाओं को बेहद सुंदर तरीके से दर्शाया गया है जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को आकर्षित करता है।
वृंदावन का इस्कॉन मंदिर विदेशी और भारतीय श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। यहां होने वाले भजन, कीर्तन और आध्यात्मिक कार्यक्रम लोगों को भीतर से शांति का अनुभव कराते हैं। अगर आप कुछ समय शोर-शराबे से दूर बिताना चाहते हैं तो इस्कॉन मंदिर का वातावरण आपके लिए बेहतरीन साबित हो सकता है।
मथुरा-वृंदावन की यात्रा यमुना घाट जाए बिना अधूरी मानी जाती है। विश्राम घाट पर होने वाली यमुना आरती बेहद आकर्षक होती है। शाम के समय दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चार का माहौल लोगों को भावुक कर देता है। कई पर्यटक यहां नौका विहार का आनंद भी लेते हैं और यमुना किनारे बैठकर शांति के कुछ पल बिताते हैं।
मथुरा-वृंदावन सिर्फ मंदिरों के लिए ही नहीं बल्कि अपने स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां का प्रसिद्ध पेड़ा देशभर में मशहूर है। इसके अलावा कचौड़ी, आलू की सब्जी, लस्सी और स्थानीय मिठाइयों का स्वाद जरूर लेना चाहिए। यहां का भोजन साधारण होने के बावजूद स्वाद और परंपरा से भरपूर होता है।
वैसे तो सालभर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है लेकिन अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और घूमने में परेशानी नहीं होती। यदि आप जन्माष्टमी, होली या राधाष्टमी जैसे त्योहारों के दौरान आते हैं तो यहां की रौनक कई गुना बढ़ जाती है। हालांकि इस समय भीड़ भी काफी ज्यादा रहती है।
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