उत्तर प्रदेश के देवबंद में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मुस्लिम समुदाय के साथ जिस प्रकार का रवैया अपनाया जा रहा है, वह न केवल समुदाय को हाशिये पर धकेलने वाला है, बल्कि देश की स्वयं की एकता के लिए भी चुनौतीपूर्ण है।

उत्तर प्रदेश के देवबंद में आयोजित जमीयत उलमा-ए-हिंद के विशेष सत्र में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दारुल उलूम के सदर मुदर्रिस मौलाना अरशद मदनी ने देश में मुसलमानों से संबंधित मौजूदा परिस्थितियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उत्तर प्रदेश के देवबंद में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मुस्लिम समुदाय के साथ जिस प्रकार का रवैया अपनाया जा रहा है, वह न केवल समुदाय को हाशिये पर धकेलने वाला है, बल्कि देश की स्वयं की एकता के लिए भी चुनौतीपूर्ण है।
मदनी ने विशेष रूप से अल फलाह यूनिवर्सिटी के चांसलर की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि चांसलर को जेल भेजे जाने के पीछे मुस्लिम होने की पहचान को कारण बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि चांसलर को जेल में डाल दिया गया है।
मदनी ने कहा कि धर्म के आधार पर लोगों को बाँटना देश को कमजोर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सांप्रदायिक ताकतें इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ माहौल बनाने में लगी हुई हैं। उनके अनुसार इस्लाम को मिटाने की कोशिश इतिहास में कई बार की गई, लेकिन हर बार ऐसा करने वाले खुद समाप्त हो गए, और इस्लाम का दीया आज भी जल रहा है और आगे भी जलता रहेगा। मदनी के पूरे वक्तव्य का सार यह था कि देश में मुसलमानों को एक सुनियोजित रूप से निशाना बनाया जा रहा है, यहां तक कि मुस्लिम संस्थानों और नेताओं पर कार्रवाई राजनीतिक और धार्मिक द्वेष से प्रेरित दिखती है। और यह सब देश की सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा है।
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