कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना रजवी ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक आत्मा का प्रतीक है। यह दिन हर नागरिक चाहे वह अल्पसंख्यक हो या बहुसंख्यक को समान अधिकार और सुरक्षा का भरोसा देता है।

UP News : गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर बरेली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान आॅल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने देशभर के मदरसा प्रबंधकों से एक महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने कहा कि मदरसों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भारतीय संविधान की शिक्षा देना समय की आवश्यकता है, ताकि वे अपने अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना रजवी ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक आत्मा का प्रतीक है। यह दिन हर नागरिक चाहे वह अल्पसंख्यक हो या बहुसंख्यक को समान अधिकार और सुरक्षा का भरोसा देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान देश की एकता, अखंडता और सामाजिक न्याय की बुनियाद है।
मौलाना रजवी के अनुसार, मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ यदि संविधान जैसे विषय को शामिल किया जाए तो नई पीढ़ी यह समझ पाएगी कि भारत में उन्हें किस प्रकार की आजादी प्राप्त है और नागरिक के रूप में उनकी क्या जिम्मेदारियाँ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मदरसा शिक्षा से जुड़े छात्र अक्सर संविधान और नागरिक अधिकारों से जुड़ी पुस्तकों से वंचित रह जाते हैं, जबकि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए यह ज्ञान अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में मदरसा जामियातुस सुवालेहात के प्रबंधक मुफ्ती फारूक मिस्बाही ने कहा कि भारत इस समय विकास और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक अहम पड़ाव पर खड़ा है। ऐसे में देश को अपनी प्रगति की आकांक्षाओं और आंतरिक सामाजिक चुनौतियों के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। उन्होंने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को आपसी समझ और संवाद के माध्यम से सुलझाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस्लामिक रिसर्च सेंटर के उप निदेशक आरिफ अंसारी ने कहा कि समाज में बढ़ते तनाव और विभाजन को कम करने के लिए भारत की प्राचीन परंपराओं, सांस्कृतिक विविधता और आपसी सम्मान की भावना को दोबारा मजबूत करना जरूरी है।
कार्यक्रम में मौलाना मुजाहिद हुसैन कादरी ने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को बिना डर और भेदभाव के अपने धर्म का पालन करने की आजादी देता है। उन्होंने बढ़ती सांप्रदायिक चुनौतियों के बीच हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सद्भाव के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताई। वहीं मौलाना गुलाम मुईनुद्दीन हशमती ने सोशल मीडिया पर फैल रही भड़काऊ और विभाजनकारी सोच को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में संयम, समझदारी और जिम्मेदार व्यवहार बेहद जरूरी है, ताकि समाज में शांति बनी रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में धार्मिक, सामाजिक और शिक्षाविद् वर्ग के लोग उपस्थित रहे और सभी ने संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता के महत्व पर एकजुट होकर विचार साझा किए।