क्या उत्तर प्रदेश की राजनीति में मायावती और चंद्रशेखर आजाद के बीच सियासी दूरी अब खुली टकराहट में बदलने लगी है? क्या 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मायावती ने पहली बार नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर इतना सीधा हमला करके कोई बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है ?

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी और आजाद समाज पार्टी के बीच सियासी खींचतान तेज होती दिखाई दे रही है। बसपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पहली बार नगीना सांसद एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद पर सीधे तौर पर निशाना साधा है। मायावती ने उनके राजनीतिक जनाधार पर सवाल उठाते हुए नगीना लोकसभा चुनाव में उनकी जीत को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। मायावती ने सोमवार को प्रेस वार्ता में चंद्रशेखर आजाद का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि जिनका अपना कोई जनाधार नहीं है, उन्हें नगीना से एक साजिश के तहत भाजपा ने चुनाव जिताया। UP News
मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब चंद्रशेखर आजाद उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार राजनीतिक गतिविधियां कर रहे हैं। आजाद समाज पार्टी की ओर से 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर जनसभाएं और संगठनात्मक गतिविधियां भी तेज की गई हैं। हालिया रिपोर्टों में चंद्रशेखर आजाद के प्रदेशभर में पार्टी के प्रभारियों और संभावित राजनीतिक गतिविधियों को लेकर सक्रिय रहने की जानकारी सामने आई है। मायावती ने चंद्रशेखर आजाद के राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि नगीना लोकसभा सीट से उनकी जीत के पीछे भाजपा की भूमिका रही। उनके इस बयान से उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। UP News
प्रेस वार्ता में मायावती ने सिर्फ चंद्रशेखर आजाद पर ही हमला नहीं किया, बल्कि चुनाव प्रक्रिया और EVM को लेकर भी अपना पुराना रुख दोहराया। उन्होंने चुनाव आयोग से EVM की जगह बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराने की अपील की। मायावती ने कहा कि चुनाव में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देने का अधिकार मिलना चाहिए और मतों की गिनती निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि चुनाव प्रक्रिया को लेकर जनता का भरोसा कमजोर होता है तो इसका असर लोकतंत्र पर पड़ता है। UP News
मायावती ने अपने बयान में भाजपा के पुराने EVM विरोध का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि जब देश में EVM के इस्तेमाल की शुरुआत हुई थी, तब भाजपा की ओर से भी मशीनों की विश्वसनीयता और हैकिंग को लेकर सवाल उठाए गए थे। बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी शुरुआत से ही EVM के इस्तेमाल का विरोध करती रही है। उन्होंने विशेष रूप से दलित, पिछड़े, आदिवासी और वंचित वर्गों के मतदाताओं का उल्लेख करते हुए बैलेट पेपर से मतदान की मांग दोहराई। हालांकि, EVM की कार्यप्रणाली और चुनावी सत्यापन को लेकर निर्वाचन अधिकारियों की ओर से अलग-अलग आधिकारिक प्रक्रियाएं निर्धारित हैं। निर्वाचन आयोग की व्यवस्था में EVM के साथ VVPAT का इस्तेमाल भी शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि EVM को लेकर चंद्रशेखर आजाद का रुख भी मायावती से अलग नहीं है। हाल में नगीना सांसद ने चुनाव आयोग से EVM की जगह बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग की थी और चुनाव प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखने की बात कही थी। UP News
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