
उत्तर प्रदेश की सियासत में बसपा प्रमुख मायावती ने फिर से दबदबा बनाने की दिशा में बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए गुरुवार को संगठन में बड़े बदलाव किए, जिसमें उन्होंने भतीजे आकाश आनंद को नंबर-2 की कुर्सी सौंपकर अपनी पकड़ और सियासी रणनीति को स्पष्ट कर दिया। वहीं, कुछ पुराने भरोसेमंद नेताओं की जिम्मेदारियों में कटौती कर मायावती ने यह संदेश भी दिया कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब नई चालें चलने वाली हैं। UP News
उत्तर प्रदेश की सियासत में मायावती ने फिर से अपने नेतृत्व का असर दिखाया है। भतीजे आकाश आनंद को मुख्य राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाकर उन्होंने उनकी सियासी हैसियत बढ़ा दी है। यह पद संगठन में राष्ट्रीय अध्यक्ष यानी मायावती के बाद सबसे अहम माना जाता है। अब आकाश आनंद उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में बसपा के केंद्रीय और राज्य कोऑर्डिनेटरों के काम की निगरानी करेंगे और सीधे मायावती को रिपोर्ट करेंगे। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह कदम बसपा को उत्तर प्रदेश में फिर से मजबूत स्थिति दिलाने की रणनीति का अहम हिस्सा है। UP News
मायावती ने बसपा संगठन में नई ऊर्जा भरते हुए राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटरों की संख्या तीन से बढ़ाकर छह कर दी है। अब इस अहम टीम में भतीजे आकाश आनंद के अलावा रामजी गौतम, राजाराम, रणधीर सिंह बेनीवाल, लालजी मेधांकर, अतर सिंह राव और धर्मवीर सिंह अशोक शामिल हैं। खास बात यह है कि लालजी, अतर और धर्मवीर को पहली बार यह जिम्मेदारी दी गई है, जबकि राजाराम, रामजी और बेनीवाल पहले से इस पद पर काम कर रहे थे। साथ ही कुछ नेताओं को सह-प्रभारी बनाकर मायावती ने संगठन में संतुलन और नए नेतृत्व को अवसर देने की रणनीति भी अपनाई है। UP News
राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर रामजी गौतम को अब चार राज्यों—दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार—का प्रभारी बनाया गया है। राजस्थान जैसे महत्वपूर्ण राज्य की कमान उनसे छीनी गई, जो उनके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे पहले रामजी देश के आधे से ज्यादा राज्यों के प्रभारी थे। मायावती के इस कदम से यह संकेत मिल रहा है कि संगठन में संतुलन और नए नेतृत्व को मौका देने की रणनीति अपनाई जा रही है।
उत्तर प्रदेश में मायावती ने अपनी सियासी पकड़ को और मजबूत किया है। यूपी प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल को लगातार दूसरी बार जिम्मेदारी सौंपकर उन्होंने पार्टी के कोर वोट बैंक यानी पाल-गड़रिया समुदाय पर भरोसा जताया है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह कदम बसपा की रणनीति को मजबूत करने और अगले विधानसभा चुनाव में बेहतर स्थिति बनाने की दिशा में अहम है। सिर्फ यूपी ही नहीं, बल्कि देश के अन्य प्रमुख राज्यों में भी मायावती ने नए प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर संगठन को नया आकार दिया है।
दिल्ली में राजेश तंवर, मध्य प्रदेश में रमाकांत पिप्पल, छत्तीसगढ़ में श्याम टंडन, बिहार में शंकर महतो और महाराष्ट्र में डॉ. सुनील डोंगरे को यह जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा अन्य राज्यों में भी नए प्रदेश अध्यक्षों की तैनाती से बसपा की राष्ट्रीय संगठनात्मक ताकत और मजबूत हुई है। UP News