गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तीमारदारों से मारपीट के मामले में प्रशासन ने तीन जूनियर डॉक्टरों को एक सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीज के तीमारदारों के साथ मारपीट के मामले में कॉलेज प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। घटना की जांच के बाद तीन जूनियर डॉक्टरों को एक सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही तीनों पर 25 हजार से 50 हजार रुपये तक का अर्थदंड लगाने का भी फैसला किया गया है। आरोपित डॉक्टरों की एक महीने तक मनोचिकित्सक से काउंसलिंग कराई जाएगी और उनसे भविष्य में ऐसी घटना नहीं दोहराने का लिखित शपथ पत्र भी लिया गया है। यह मामला 6 अक्टूबर की रात का बताया जा रहा है। सड़क दुर्घटना में घायल एक मरीज की मौत के बाद पोस्टमार्टम कराने की मांग को लेकर तीमारदारों और जूनियर डॉक्टरों के बीच विवाद हुआ था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया। तीमारदारों ने पुलिस और मेडिकल कॉलेज प्रशासन से लिखित शिकायत भी की थी।
जानकारी के अनुसार, सड़क दुर्घटना में घायल एक मरीज को उपचार के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज लाया गया था। मरीज की मौत के बाद उसके तीमारदार पोस्टमार्टम कराने की मांग कर रहे थे। इसी दौरान 6 अक्टूबर की रात विवाद और मारपीट की घटना सामने आई। घटना से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ। वीडियो को लेकर तीमारदारों ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले की जांच कराई। जांच के लिए गठित कमेटी के समक्ष आरोपित जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ आरोप सिद्ध होने की बात सामने आई। इसके बाद प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन जूनियर डॉक्टरों को एक सप्ताह के लिए निलंबित करने का फैसला किया। साथ ही डॉक्टरों पर 25 हजार से 50 हजार रुपये तक का अर्थदंड लगाया गया है। अर्थदंड की अलग-अलग राशि किस डॉक्टर पर लागू हुई, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
प्रशासन ने केवल निलंबन और आर्थिक दंड तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी। तीनों डॉक्टरों की एक महीने तक मनोचिकित्सक से काउंसलिंग कराने का निर्णय भी लिया गया है। उनसे लिखित शपथ पत्र लिया गया है कि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा नहीं होगी।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के साथ उचित व्यवहार सुनिश्चित करना जरूरी है। इलाज के दौरान डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ और तीमारदारों के बीच संवाद तथा आपसी सामंजस्य बना रहना चाहिए। किसी भी तरह का विवाद बढ़ने की स्थिति में संबंधित लोगों को तत्काल प्रशासन को सूचना देनी चाहिए। कॉलेज प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और संस्थान की छवि बेहतर बनाए रखने के उद्देश्य से कार्रवाई की गई है। मामले में जांच के बाद दोषी पाए गए डॉक्टरों के विरुद्ध कदम उठाए गए हैं। UP News :
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रशासन चाहता है कि मरीजों के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार किया जाए और उनके उपचार में पूरा सहयोग दिया जाए। डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच आपसी तालमेल बनाए रखना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी वजह से तनावपूर्ण स्थिति पैदा होती है तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए, ताकि विवाद को समय रहते संभाला जा सके और मरीज के इलाज पर असर न पड़े। UP News :
अस्पतालों में मरीजों के परिजन पहले से ही बीमारी, उपचार और आर्थिक दबाव के कारण तनाव में हो सकते हैं। ऐसे में डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच संवाद की कमी कई बार विवाद की वजह बन जाती है। हालांकि, किसी भी परिस्थिति में मारपीट समस्या का समाधान नहीं है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई इस घटना पर प्रशासनिक कार्रवाई से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि मरीजों और उनके परिजनों के साथ दुर्व्यवहार के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अस्पताल प्रशासन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवहार संबंधी दिशा-निर्देशों और शिकायत निवारण व्यवस्था को किस तरह प्रभावी बनाता है। UP News :
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