मेरठ में अवैध कॉलोनियों को लेकर मामला अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। वर्षों से विकसित हो रही इन कॉलोनियों को लेकर उठते रहे सवालों पर अब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती दिखाई दे रही है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद इस मामले की तस्वीर आने वाले दिनों में और साफ होने वाली है।

UP News : मेरठ में अवैध कॉलोनियों को लेकर मामला अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। वर्षों से विकसित हो रही इन कॉलोनियों को लेकर उठते रहे सवालों पर अब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती दिखाई दे रही है। उल्देपुर और आसपास के इलाकों में आखिर इतनी बड़ी संख्या में कॉलोनियां कैसे विकसित होती चली गईं और इस पूरे मामले में जिम्मेदारी किसकी बनती है? जमीन से लेकर कॉलोनियों के विकास और निगरानी व्यवस्था तक कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब अब तलाशे जाएंगे। आयोग न केवल जमीन के स्वामित्व और खरीद-फरोख्त की पड़ताल करेगा, बल्कि यह भी जांचेगा कि मेरठ विकास प्राधिकरण यानी मेडा की भूमिका क्या रही और वर्षों तक इन कॉलोनियों के विकसित होने के दौरान कार्रवाई क्यों नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद इस मामले की तस्वीर आने वाले दिनों में और साफ होने वाली है। UP News
उल्देपुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसी आवासीय कॉलोनियां विकसित होने का मामला सामने आया है, जिनके लिए मेरठ विकास प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत नहीं कराया गया था। सुप्रीम कोर्ट के सामने यह भी बताया गया कि इन कॉलोनियों की जमीन निजी बताई गई है। अब अदालत ने इसी बिंदु से आगे की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने का फैसला किया है। आयोग यह पता लगाएगा कि इन कॉलोनियों के लिए इस्तेमाल की गई जमीन वास्तव में किसकी थी। अगर जमीन निजी लोगों की थी तो उनके और प्लॉट खरीदारों के बीच लेन-देन किस तरीके से हुआ, इसकी भी जांच की जाएगी। UP News
उल्देपुर और उसके आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनियां विकसित होने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। इस क्षेत्र में 50 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों के विकसित होने की बात सामने आई है, जबकि बाद के सर्वे और कार्रवाई के दायरे में इससे भी अधिक कॉलोनियों का उल्लेख किया गया है। उल्देपुर क्षेत्र की 100 से अधिक कॉलोनियों को कार्रवाई के दायरे में है। UP News
इस मामले का सबसे अहम सवाल मेरठ विकास प्राधिकरण की भूमिका को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग के सामने यह सवाल रखा है कि मेडा पांच साल से अधिक समय तक क्या करता रहा और उसकी निगरानी के बावजूद अवैध कॉलोनियां विकसित कैसे होती रहीं। आयोग यह भी जांच करेगा कि क्या अवैध कॉलोनियों के विकास में मेडा के किसी अधिकारी की भूमिका या मिलीभगत थी। हालांकि, इस स्तर पर किसी अधिकारी को दोषी ठहराया नहीं गया है। यह आरोप और भूमिका न्यायिक आयोग की जांच का विषय है। UP News
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया को न्यायिक आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। उन्हें जांच को प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए आयोग में अन्य सदस्यों को शामिल करने की अनुमति भी दी गई है। उत्तर प्रदेश के आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद को आयोग के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। राज्य सरकार आयोग को जरूरी सचिवालय और प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराएगी। आयोग के सदस्यों के पारिश्रमिक के लिए राज्य सरकार को 35 लाख रुपये सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने का निर्देश दिया गया है। UP News
सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए कई अहम बिंदु तय किए हैं। इनमें मुख्य रूप से यह पता लगाया जाएगा—
जांच के साथ सुप्रीम कोर्ट ने उल्देपुर में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं। मेडा को वहां मौजूद अवैध निर्माणों को जल्द से जल्द ध्वस्त करने का आदेश दिया गया है। ध्वस्तीकरण से निकलने वाले मलबे को भी रोजाना हटाने के निर्देश दिए गए हैं। उल्देपुर क्षेत्र में 100 से अधिक अवैध कॉलोनियां कार्रवाई के दायरे में बताई गई थीं। चार किलोमीटर के दायरे में 20 से अधिक अवैध कॉलोनियों का भी उल्लेख किया गया था। अंतिम संख्या जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। UP News
उल्देपुर के अलावा मेरठ शहर के जोन-ए में 16,726 अनधिकृत निर्माण चिन्हित किए गए हैं। इनमें 12,907 आवासीय, 874 आवासीय-सह-गैर आवासीय और 2,945 गैर आवासीय निर्माण शामिल बताए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन निर्माणों के खिलाफ सीलिंग और खाली कराने की प्रक्रिया के निर्देश दिए हैं। मेरठ को चार जोन A, B, C और D में बांटकर अवैध निर्माण का सर्वे किया गया है। अन्य जोन की रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष पेश की जानी है। मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को होगी। UP News
उल्देपुर की अवैध कॉलोनियों को लेकर अब जांच केवल निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी। जमीन के मालिकाना हक से लेकर प्लॉट की खरीद-फरोख्त और प्राधिकरण की निगरानी तक पूरी प्रक्रिया की पड़ताल होगी। ऐसे में न्यायिक आयोग की रिपोर्ट से यह साफ होने की उम्मीद है कि आखिर वह कौन-सी व्यवस्था थी, जिसके बीच मेरठ में इतनी बड़ी संख्या में अनधिकृत कॉलोनियां विकसित होती चली गईं। UP News
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