उत्तर प्रदेश ATS ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंध रखने वाले मोहम्मद जफर को मेरठ से गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी पाकिस्तान में मौजूद हैंडलरों के संपर्क में था और संगठन के लिए आर्थिक मदद जुटाने के साथ आतंकी विचारधारा के प्रचार से जुड़ा हुआ था।

UP News : उत्तर प्रदेश ATS ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंध रखने वाले मोहम्मद जफर को मेरठ से गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी पाकिस्तान में मौजूद हैंडलरों के संपर्क में था और संगठन के लिए आर्थिक मदद जुटाने के साथ आतंकी विचारधारा के प्रचार से जुड़ा हुआ था। ATS की जांच में उसके सोशल मीडिया इस्तेमाल और मदरसे से जुड़े नेटवर्क को लेकर भी गंभीर जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। एटीएस के अनुसार, आरोपी ऑनलाइन माध्यमों से आतंकी विचारधारा से संबंधित सामग्री साझा करता था। UP News
जांच के मुताबिक, मोहम्मद जफर वर्ष 2017 से 2022 के बीच मेरठ के गुदड़ी बाजार स्थित एक मदरसे में पढ़ाई करता था। एटीएस अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2020 के आसपास वह मौलाना मसूद अजहर से जुड़ी ऑनलाइन सामग्री देखने लगा था। इसके बाद 2022 में उसने सोशल मीडिया पर जिहाद से संबंधित वीडियो पोस्ट करना शुरू किया। एटीएस का दावा है कि इसके बाद जफर ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ने के लिए ऑनलाइन माध्यमों से प्रयास किए। इसी दौरान वह कथित तौर पर पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों के संपर्क में आया और व्हाट्सऐप समेत अन्य डिजिटल माध्यमों से बातचीत करने लगा। UP News
जांच एजेंसी के मुताबिक, बातचीत के दौरान जब कथित हैंडलर ने जफर से उसके काम के बारे में पूछा तो उसने खुद को शिक्षक बताया और मदरसे में पढ़ाने की जानकारी दी। इसके बाद उसे कथित तौर पर आतंकी विचारधारा के प्रचार और संगठन के लिए आर्थिक मदद जुटाने से जुड़े काम सौंपे गए। एटीएस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी ने किन लोगों से संपर्क किया और क्या उसने अन्य युवाओं को भी आतंकी विचारधारा से प्रभावित करने का प्रयास किया। एजेंसी को उसके डिजिटल उपकरणों से मिले डेटा के आधार पर आगे की जांच बढ़ाई जा रही है। UP News
मोहम्मद जफर के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। एटीएस उसके कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया खातों और ऑनलाइन संपर्कों की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपी की आवाजाही उत्तर प्रदेश और बिहार के अलावा किन अन्य स्थानों तक रही। इसके लिए उसके मोबाइल डेटा के आधार पर रूट और संपर्कों का मिलान किया जा रहा है। कस्टडी रिमांड मिलने के बाद पूछताछ के जरिए जांच को और आगे बढ़ाने की तैयारी है। मामले में कथित आतंकी फंडिंग की जांच के लिए एटीएस ने आरोपी के क्रिप्टोकरेंसी खातों से जुड़े लेनदेन की जानकारी जुटानी शुरू की है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी के जरिए पाकिस्तान तक रकम पहुंचाने की कोशिश किए जाने की आशंका है। एटीएस का कहना है कि शुरुआत में कथित पाकिस्तानी हैंडलर की ओर से कुछ बैंक खातों की जानकारी दी गई थी। वहां रकम भेजने में परेशानी आने के बाद डिजिटल माध्यम से लेनदेन की बात सामने आई। इसके बाद आरोपी को कुछ क्रिप्टो खातों की जानकारी दिए जाने का दावा किया गया है। UP News
जांच एजेंसी अब आरोपी से जुड़े बाइनेंस खाते और उसमें हुए लेनदेन का विवरण जुटा रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि रकम का स्रोत क्या था, किन माध्यमों से लेनदेन हुआ और पैसा किन खातों या वॉलेट तक पहुंचा। एटीएस बैंकिंग रिकॉर्ड, क्रिप्टो लेनदेन, मोबाइल डेटा और सोशल मीडिया गतिविधियों को एक साथ जोड़कर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस मामले में आरोपी के अलावा और कौन लोग जुड़े हो सकते हैं। UP News
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