मेरठ-सहारनपुर शिक्षक MLC चुनाव 2026 में प्रत्याशियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। निजी शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के शोषण के आरोपों के बीच डॉ. कुलदीप मलिक की उम्मीदवारी और शिक्षक अधिकारों पर चर्चा तेज है।

Uttar Pradesh MLC Elections : उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के नेता बनाने वाले MLC के चुनाव चल रहे हैं। MLC के इन चुनावों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के तमाम शिक्षक वोट डालकर अपने जनप्रतिनिधि (MLC) का चुनाव करेंगे। 23 नवंबर को होने वाले चुनाव की मतगणना 27 अक्टूबर 2026 को होगी। इस दौरान MLC के चुनाव में मेरठ तथा सहारनपुर सीट से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को लेकर एक चौंकाने वाला तथ्य प्रकाश में आया है। पता चला है कि मेरठ तथा सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से MLC का चुनाव लड़ रहे भाजपा, सपा तथा दूसरे राजनीतिक दलों के प्रत्याशी स्कूल-कॉलिजों के प्रबंधक हैं। चुनाव लड़ रहे इन प्रबंधकों पर स्पष्ट आरोप है कि यें प्रबंधक खुद ही शिक्षकों का शोषण कर रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश में मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के MLC चुनाव में एक चौंकाने वाला सवाल खड़ा हो गया है। शिक्षकों के हितों की रक्षा करने और उन्हें शोषण से मुक्ति दिलाने का दावा करने वाले राजनैतिक दलों के MLC के प्रत्याशी खुद ही वें लोग हैं जो अपने स्कूल तथा कॉलेज चलाकर खुलेआम शिक्षकों का उत्पीड़न तथा शोषण करते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय एक शिक्षक नेता ने आरोप लगाया है कि चुनाव मैदान में उतरे सभी राजनैतिक दलों के प्रत्याशी निजी शैक्षणिक संस्थानों के प्रबंधक हैं, जहां शिक्षकों के आर्थिक और मानसिक शोषण की शिकायतें हमेशा सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल है कि जो लोग खुद शिक्षकों के शोषण के आरोपों के घेरे में हैं, वे विधान परिषद में पहुंचकर शिक्षकों को न्याय कैसे दिलाएंगे? शिक्षकों के सामने अब अपने प्रतिनिधि को चुनने का महत्वपूर्ण अवसर है। 23 अक्टूबर 2026 को किसी शिक्षक को अपना MLC चुनकर तमाम शिक्षक शोषण तथा उत्पीडन से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। Uttar Pradesh MLC Elections :
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन सीट का चुनाव इस बार केवल राजनीतिक दलों के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई नहीं रह गया है। इस चुनाव में शिक्षकों के अधिकार, सम्मान, वेतन, सेवा सुरक्षा और निजी शिक्षण संस्थानों में काम करने वाले अध्यापकों की स्थिति जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। चुनावी माहौल के बीच एक शिक्षक नेता की ओर से उठाए गए सवालों ने प्रत्याशियों की भूमिका और उनके शिक्षक हितैषी होने के दावों पर बहस छेड़ दी है। आरोप है कि शिक्षक राजनीति में सक्रिय सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी जो MLC का चुनाव लड़ रहे हैं उनके अपने निजी शैक्षणिक संस्थान हैं और वहां बड़ी संख्या में शिक्षक काम करते हैं। सवाल उठाया जा रहा है कि यदि किसी संस्थान में शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिलता, उनकी सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं होता या उन्हें आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है, तो उस संस्थान के प्रबंधन से जुड़े व्यक्ति को शिक्षकों के अधिकारों का सबसे बड़ा पैरोकार कैसे माना जाए ? ऐसे व्यक्ति को वोट देकर अपना MLC कैसे बनाया जाए ? यह आरोप चुनावी बहस में एक गंभीर सवाल बनकर सामने आया है। Uttar Pradesh MLC Elections :
शिक्षक MLC का पद सामान्य राजनीतिक पदों से अलग प्रकृति रखता है। इस निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षक मतदाता अपने पेशे, सेवा शर्तों और अधिकारों से जुड़े सवालों को विधान परिषद तक पहुंचाने के लिए प्रतिनिधि चुनते हैं। ऐसे में प्रत्याशी की राजनीतिक पहचान के साथ-साथ उसका शिक्षक समुदाय से वास्तविक जुड़ाव और शिक्षकों की समस्याओं के प्रति उसका रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो जाता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय एक शिक्षक नेता ने दावा किया है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष से जुड़े तमाम प्रत्याशियों के निजी शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत शिक्षक शोषण से परेशान हैं। उनका सवाल है कि जो लोग अपने संस्थानों में काम करने वाले शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे, वे पूरे प्रदेश के शिक्षकों के लिए न्याय की लड़ाई कैसे लड़ेंगे ? इस आरोप के सामने आने के बाद शिक्षकों के बीच यह चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है कि प्रत्याशियों से उनके संस्थानों में कार्यरत अध्यापकों की सेवा शर्तों, वेतन भुगतान, नौकरी की सुरक्षा और शिकायतों के निस्तारण का रिकॉर्ड क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए। शिक्षकों के प्रतिनिधि से सवाल पूछना किसी राजनीतिक दल का विरोध नहीं, बल्कि शिक्षक समुदाय के अधिकारों और जवाबदेही से जुड़ा विषय है।
मेरठ—सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से MLC का चुनाव लड़ रहे एकमात्र शिक्षक डॉ. कुलदीप मलिक का नाम अकेला ऐसा नाम है जो किसी शिक्षण संस्थान के प्रबंधक न होकर खुद एक शिक्षक हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शिक्षकों का कहना है कि प्रसिद्ध शिक्षक नेता ओमप्रकाश शर्मा के मार्ग पर चल रहे डॉ. कुलदीप मलिक मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। डॉ0 कुलदीप मलिक के विषय में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह स्वयं शिक्षक हैं और शिक्षकों की समस्याओं को नजदीक से समझते हैं।
शिक्षक समुदाय के बीच उठ रही बहस में उन्हें ऐसे प्रत्याशी के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जो निजी शिक्षण संस्थानों में काम करने वाले अध्यापकों की परेशानियों, वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय और सेवा संबंधी समस्याओं को प्रमुखता से उठाने की बात करते हैं।
वर्ष 2026 के इस चुनाव में पुराने शिक्षक राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल रहा है। भाजपा के श्रीचंद शर्मा और समाजवादी पार्टी के नितिन कुमार तोमर के अलावा कई निर्दलीय प्रत्याशी भी शिक्षक सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 10 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अंतिम प्रत्याशी सूची के अनुसार, मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में ये 10 उम्मीदवार मैदान में हैं:-
श्रीचंद शर्मा — भाजपा
नितिन कुमार तोमर — समाजवादी पार्टी
डॉ. सुशील कुमार पुंडीर — निर्दलीय
सुशील — निर्दलीय
हरकेश सिंह — निर्दलीय
स्वराज पाल — निर्दलीय
डॉ. कुलदीप मलिक — निर्दलीय
तनुज गंभीर — निर्दलीय
बाकिर हुसैन — निर्दलीय
पंकज कुमार — निर्दलीय
शिक्षक MLC चुनाव की चर्चा में सबसे महत्वपूर्ण सवाल उन अध्यापकों का है, जो निजी और वित्तविहीन शैक्षणिक संस्थानों में काम करते हैं। इन संस्थानों में शिक्षकों की सेवा संबंधी परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन जहां वेतन भुगतान में देरी, अनुचित सेवा शर्तों, नौकरी से हटाने की धमकी या शिकायतों की अनदेखी जैसी समस्याएं मौजूद हैं, वहां जवाबदेही तय होना जरूरी है। किसी भी शिक्षक को अपनी नौकरी खोने के डर से अपने अधिकारों की बात कहने में कठिनाई नहीं होनी चाहिए। यदि शिक्षक अपने संस्थान के प्रबंधन के खिलाफ शिकायत करने से डरते हैं, तो उनकी समस्याओं को सामने लाने के लिए गोपनीय शिकायत व्यवस्था और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय अधिकतर शिक्षकों का कहना है कि इस चुनाव में डॉ. कुलदीप मलिक ही एक ऐसे प्रत्याशी के रूप में उभरकर सामने आए हैं जिनको सही अर्थों में शिक्षकों का नेता कहा जा सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय प्रसिद्ध शिक्षक पंकज कुमार शर्मा का कहना है कि लगातार 48 वर्षों तक इस सीट पर MLC रहे ओमप्रकाश शर्मा के रास्ते पर चलकर डॉ. कुलदीप मलिक शिक्ष्कों का बड़ा भल कर सकते हैं। Uttar Pradesh MLC Elections :
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