50 वर्षों के लिए मेगा प्लान, इन चार शहरों में नहीं होगा ट्रैफिक जाम
Noida News
भारत
चेतना मंच
26 Feb 2024 10:42 PM
उत्तर प्रदेश के नोएडा सहित 4 जिलों में भविष्य में बढ़ती आबादी के चलते नोएडा व इन जिलों में वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक न लगे इसके लिए आने वाले 50 वर्षों के लिए मेगा प्लान तैयार किया गया है। कंप्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान (Comprehensive Mobility Plan) योजना के तहत नोएडा (गौतमबुद्धनगर), गाजियाबाद, बुलंदशहर तथा हापुड़ के लिए यह प्लान कारगर साबित होगा। यह कार्य किस कंपनी को दिया जाएगा इसका पता अगले सप्ताह तक पता चल जाएगा। यह व्यवस्था आगामी 50 वर्षों के लिए की जा रही है ताकि दिल्ली-एनसीआर के चार जिलों में यातायात जाम की समस्या से जूझना न पड़े। इसकी पहल नोएडा प्राधिकरण ने की है।
दरअसल नोएडा, ग्रेटर-नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण ने अकेले ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में करीब 2 लाख करोड़ के निवेश का ग्राउंड तैयार किया है। यहां आने वाली कंपनियों को बेहतर इंफ्रा स्ट्रक्चर के साथ बेहतर रोड कनेक्टिविटी भी दी जानी है। ये रोड कनेक्टिविटी दिल्ली को जोड़ते हुए होनी चाहिए। इसलिए सलाहकार कंपनी इसी दिशा में अपना प्लान तैयार करेंगी। इसके लिए दो कंपनियां सामने आई हैं। पहली लार्सन एंड टर्बो (एल एंड टी) तथा दूसरी यूएमटीसी (अर्बन मॉस टांजिस्ट कंपनी)।
दोनों कंपनियों में से किसी कंपनी का चयन तीनों प्राधिकरण के सीईओ मिलकर करेंगे। इसके बाद प्लान तैयार किया जाएगा। शासन की ओर से इसे अप्रूवल मिलेगा। इस प्लान को सभी जिले और प्राधिकरण अपने-अपने क्षेत्र में लागू करेंगे। इसमें सडक़ों की चौड़ाई बढ़ाने से लेकर नए फ्लाईओवर, बॉटलनेक और ट्रांसपोटेशन को ध्यान में रखा जाएगा। प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम ने बताया कि सीएमपी के लिए दो कंपनियां एलएंडटी और यूएमटीसी आई है। तीनों प्राधिकरण के सीईओ की उपस्थिति के बाद निर्णय लिया जाएगा। किसी एक कंपनी को फाइनल किया जाए या फिर से आरएफपी जारी की जाए। इसके बाद प्लान तैयार होगा।
इन जिलों को दिल्ली से दी जाएगी कनेक्टविटी
4 जिलों को जाम मुक्त बनाने के लिए रीजनल कांप्रेहेंसिव मोबिलिटी प्लान (CMP) की पहली बैठक 4 महीने पहले नोएडा प्राधिकरण में हुई थी। ये प्लान नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना विकास, डीएनजीआईआर ( गौतमबुद्ध नगार), गाजियाबाद, हापुड़ , बुलंदशहर के लिए बनाया जा रहा है। इन शहरों की कनेक्टिविटी राजधानी दिल्ली से बेहतर हो इस पर फोकस किया जाएगा। आरएफपी के तहत ये कंपनियां आई है।
3 महीने में देना होगा प्लान
इस रीजनल प्लान में हापुड़ और गाजियाबाद को भी जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि लोकल स्तर पर भी कई मोबिलिटी प्लान है। सलाहकार कंपनी इन क्षेत्रीय प्लान का अध्ययन करेगी और उसमें दिए गए बेहतर प्लान या सुझाव को वो अपनी डीपीआर में शामिल करेगी। इसके लिए सलाहकार कंपनी को अधिकतम डेढ़ साल का समय दिया जाएगा। लेकिन प्राथमिक प्लान उसे तीन महीने में ही देना होगा। जिस पर एक रिपोर्ट तैयार कर हम शासन को भेजेंगे।
इन 9 पाइंट पर बनेगा रीजनल प्लान
सबसे पहले सलाहकार कंपनी तीनों शहर के लोकल प्राधिकरण के प्लानिंग सेल से बात करेगी और विजिट करके शहरी और ग्रामीण इलाकों की एक ब्रीफ तैयार करेगी। जिसमें लोकेशन, लैंड एरिया, रोड नेटवर्क, रीजनल इकोनॉमिक, स्ट्रक्चर उपलब्धता को शामिल किया जाएगा। सभी प्रकार की डेटा एनालिसिस रिपोर्ट को एकत्रित करना जिसमें यहां सामाजिक परिवेश, रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क, अर्बन ट्रांसपोर्ट नियम, रीजनल ट्रांसपोर्ट पॉलिसी, नेशनल और स्टेट रूल, सडक़ हादसे, लैंड यूज, मेप शामिल है।
सर्वे प्लान तैयार किया जाएगा
इसके बाद हित धारक, पब्लिक और अन्य लोगों से इस सर्वे प्लान पर बातचीत की जाएगी। फिर डिटेल सर्वे होगा जिसमें यहां निर्मित इमारतों की संख्या, ट्रैफिक, रोड पर स्पीड, पार्किंग, पेडेस्ट्रेन का डाटा लेकर ग्राउंड रिपोर्ट की जाएगी। ये टाइम, कास्ट, कम्फर्ट, सेफ्टी और सिक्योरिटी के लिहाज से तैयार की जाएगी। यहां एक महत्वपूर्ण पाइंट प्रदूषण से संबंधित भी होगा। इसके लिए डीजल, पेट्रोल, एलपीजी और इलेक्ट्रिक का डाटा लेकर ये चेक किया जाएगा कि इसका कितना असर प्लान के अनुसार कम होगा या बढ़ेगा।
नोएडा, ग्रेटर-नोएडा और यमुना क्षेत्र में ई-बस चलाने का प्राविधान है। इसे मोबिलिटी प्लान में ही शामिल किया जाएगा। इसके लिए अलग से इन्फ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी। जिसमें एडमिन ब्लाक, चार्जिंग स्टेशन, डिपो, वर्कशॉप आदि। रोड नेटवर्क, इंटर कनेक्टिविटी, पार्किंग उपलब्धता और उसके प्रकार, पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम, पेरा ट्रांजिट सिस्टम, सडक़ों पर ट्रैफिक का भार, ट्रैफिक सेफ्टी को शामिल करते हुए फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। ये फाइनल ड्राफ्ट कंपनी गठित की गई समिति के सामने रखेगी। बोर्ड से अप्रूव होने पर इस पर काम शुरू किया जाएगा।