प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी से रामनवमी के अवसर पर एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश कर दी। यहां मुस्लिम महिलाओं ने भगवान श्रीराम और माता जानकी की आरती उतारकर न सिर्फ आस्था जताई, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और भाईचारे का संदेश भी दिया।

UP News: उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी से रामनवमी के अवसर पर एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश कर दी। यहां मुस्लिम महिलाओं ने भगवान श्रीराम और माता जानकी की आरती उतारकर न सिर्फ आस्था जताई, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और भाईचारे का संदेश भी दिया।
रामनवमी के पावन अवसर पर मुस्लिम महिलाओं ने सुभाष भवन में एकत्रित होकर पूरे विधि-विधान से भगवान राम की महाआरती की। उनके हाथों में सजे पूजा थाल, होठों पर रामनाम और आंखों में भक्ति की चमक ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने कहा कि आज दुनिया के कई हिस्सों में हिंसा और नफरत का माहौल है। ऐसे समय में भगवान राम के आदर्श सत्य, मर्यादा और करुणा ही विश्व को शांति का रास्ता दिखा सकते हैं। उन्होंने मध्य एशिया के मुस्लिम देशों के लिए भी शांति और भाईचारे की कामना की।
इस आयोजन का उद्देश्य समाज में एकता और सद्भाव को मजबूत करना था। महिलाओं ने स्पष्ट कहा कि धर्म बदल सकता है, लेकिन पूर्वज और संस्कृति नहीं बदलते। भगवान राम सभी के हैं और उनके आदर्श सार्वभौमिक हैं। मुस्लिम महिला फाउंडेशन की पदाधिकारियों ने कहा कि समाज को जोड़ना ही उनका लक्ष्य है। उन्होंने उन ताकतों पर भी सवाल उठाए जो धर्म के नाम पर नफरत फैलाने का काम करती हैं। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि राम के मार्ग पर चलकर ही समाज में प्रेम और शांति स्थापित की जा सकती है।
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे हर साल रामनवमी के अवसर पर इसी तरह आयोजन करती रहेंगी और समाज में सद्भाव फैलाने का काम जारी रखेंगी। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की धमकियों से वे डरने वाली नहीं हैं। यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश है भारत की असली पहचान उसकी एकता, विविधता और आपसी सम्मान में है।