उत्तर प्रदेश के इटावा के जसवंतनगर में नाबालिग बच्चे से पानी के कैंपर ढुलवाने का कथित मामला सामने आया है। छिमारा रोड क्षेत्र में पानी सप्लाई के काम से जुड़े बच्चे का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने इसे बाल श्रम का मामला बताते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है।

UP News : उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद के जसवंतनगर में नाबालिग बच्चे से पानी के कैंपर ढुलवाने का कथित मामला सामने आया है। छिमारा रोड क्षेत्र में पानी सप्लाई के काम से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने इसे बाल श्रम का मामला बताते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पानी सप्लाई करने वाले एक व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर नाबालिग बच्चे को पानी के कैंपर पहुंचाने के काम में लगाया जा रहा है। वीडियो में बच्चा पानी का कैंपर लेकर जाता दिखाई दे रहा है। लोगों का कहना है कि बच्चे की उम्र कम प्रतीत होती है और वह नियमित रूप से इस तरह का काम करता दिखाई देता है। हालांकि, बच्चे की वास्तविक उम्र और उसके काम करने की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
छिमारा रोड क्षेत्र में सामने आए वीडियो ने स्थानीय स्तर पर बाल श्रम को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का दावा है कि पानी सप्लाई के काम में बच्चे का इस्तेमाल किया जा रहा है। लोगों ने संबंधित अधिकारियों से बच्चे की उम्र की जांच कराने के साथ यह भी पता लगाने की मांग की है कि उससे नियमित रूप से काम कराया जा रहा था या नहीं। भारत में बच्चों और किशोरों को श्रम से बचाने के लिए बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 में संशोधन के बाद कई महत्वपूर्ण प्रावधान लागू हैं। सामान्य तौर पर 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को रोजगार या काम पर लगाना प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों को खतरनाक व्यवसायों और प्रक्रियाओं में काम कराने पर भी रोक है। किसी मामले में कानून की कौन-सी धाराएं लागू होंगी, यह बच्चे की उम्र, काम की प्रकृति और जांच में सामने आए तथ्यों पर निर्भर करेगा। UP News :
स्थानीय लोगों ने श्रम विभाग, बाल संरक्षण इकाई और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सबसे पहले बच्चे की वास्तविक उम्र का सत्यापन होना चाहिए। यदि जांच में बाल श्रम की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही बच्चे की शिक्षा, सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है।
फिलहाल सामने आए वीडियो और स्थानीय लोगों के आरोपों के आधार पर मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन बच्चे की उम्र, उससे काम कराए जाने की अवधि और पानी सप्लाई करने वाले व्यक्ति की भूमिका समेत कई बिंदुओं पर आधिकारिक जांच जरूरी है। अब देखना होगा कि श्रम विभाग और बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारी मामले का संज्ञान लेते हैं या नहीं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
चेतना मंच की नजर
बच्चों से जुड़े ऐसे मामलों में आरोपों की पुष्टि से पहले तथ्यात्मक जांच बेहद जरूरी है। यदि कोई बच्चा वास्तव में श्रम में लगाया जा रहा है तो उसकी पहचान सार्वजनिक किए बिना उसकी सुरक्षा, शिक्षा और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही कानून का उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। UP News :
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