चमत्कारी शिव मंदिर जिसके शिखर पर लगा त्रिशूल सूर्य के सापेक्ष परिवर्तित होता है
एक ऐसा चमत्कारी शिव मंदिर जिसके गुंबद पर लगा त्रिशूल अपने आप सूर्य के सापेक्ष परिवर्तित होता हैं ।
Uttar Pradesh News
भारत
चेतना मंच
27 Jan 2024 07:30 PM
Uttar Pradesh News : सनातन धर्म मे कई ऐसे मन्दिर हैं जिनके बारे मे कई चमत्कार आपने सुने होगे । इसी कड़ी मे रायबरेली का एक अनोखा शिव मंदिर है जिसके चमत्कार के कई किस्से सुनने मे आते हैं । इस शिव मन्दिर में सच्चे मन से जो भी भक्त आता है उसकी मनोकामना जरुर पूरी होती है । आज हम बताने जा रहे हैं रायबरेली के बाबा बालेश्वर मन्दिर के बारे में । यहा हर वर्ष सावन के माह मे काफी बड़ा मेला लगता हैं जिसमे दूर दूर से लोग आते हैं ।इस अनोखे शिव मंदिर से जुड़ी कहानी आपको हैरत मे डाल देगी और आप इस मंदिर के दर्शन किये बैगेर रह नही पाएंगे।
स्वयंभू शिवलिंग के पीछे की कहानी:
उत्तरप्रदेश के रायबरेली जनपद के लालगंज तहसील के बल्हेमऊ गाव में एक शिव जी का मन्दिर हैं । कहा जाता है कि यह मंदिर लगभग 500 वर्ष पुराना हैं । पूर्व में इस मंदिर के पास घने जंगल हुआ करते थे। पास के गांव की गाय यहा चरने के लिये आया करती थी। उन गायों मे से एक गाय ने दूध देना बंद कर दिया । गाय का जो मालिक था जब उसने यह देखा तो उसे चिंता हो गयी। उसे लगा की जब गाय चरने के लिये जाती हैं तो उसकी गाय का दूध कोई चोरी कर ले जाता है । इसलिये उसकी गाय दूध देना बंद कर दिया। अखिर गाय का दूध चोरी कौन करता हैं । ये जानने के लियें गाय का मालिक जंगल में झाड़ियो मे छिप कर बैठ गया। कुछ देर बाद गाय मालिक ने देखा की गाय एक झाड़ी मे चली गयी वहा उसके थन से दूध बहने लगा । जब गाय मालिक ने यह देखा तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि ये कैसे हो रहा है और देख कर घर वापस आ गया। घर आकर उसने गांव वालो को बताया तो सबने मिलकर उस जगह की जांच-पड़ताल की तो वहा एक शिवलिंग निकल आया। तभी से लोग उस जगह पर पूजा करने लगे। यहां पर मौजूद शिवलिंग स्वयंभू हैं ।
मंदिर परिसर मे है अद्भुत सरोवर और दिशा परिवर्तित होता त्रिशूल:
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उत्तरप्रदेश के इस मंदिर के पुजारी जी बताते हैं कि इस मंदिर परिसर मे एक सरोवर भी हैं । कहा जाता है कि इस सरोवर मे सभी तीर्थों का जल ला कर इसमे डाला गया है । इसी जल से भगवान शिव का अभिषेक करते है । यहां आने वाले सभी शिव भक्त इसी सरोवर के जल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं । इसके साथ ही इस मन्दिर के गुंबद पर एक त्रिशूल लगा है जो की सूर्य की दिशा के सापेक्ष परिवर्तित होता रहता है । उत्तरप्रदेश के इस मंदिर पर भक्तों की अटूट श्रद्धाभाव हैं । कहा जाता हैं कि यहां आने वाले भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है ।
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