मिर्जापुर जिले के जमालपुर विकासखंड में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए प्राथमिक विद्यालयों की बदहाली ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2022-23 में गरीब और ग्रामीण बच्चों को गांव के नजदीक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पांच प्राथमिक विद्यालयों का निर्माण कराया गया था ।

UP News : उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकारी स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन मिर्जापुर जिले के जमालपुर विकासखंड से सामने आई तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती है। यहां गरीब बच्चों को उनके गांव के नजदीक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से बनाए गए कुछ प्राथमिक विद्यालय अब देखरेख के अभाव में जर्जर होते जा रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें से कुछ विद्यालयों में अब तक नियमित पठन-पाठन भी शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में करोड़ों नहीं, बल्कि लाखों रुपये खर्च कर तैयार किए गए इन भवनों के उपयोग और सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। UP News
मामला मिर्जापुर के जमालपुर विकासखंड का है। जानकारी के मुताबिक शासन की ओर से वर्ष 2022-23 में हिनौती ग्राम पंचायत के अलमापुर, पिड़खिर ग्राम पंचायत के भैंसा सुर, भदावल ग्राम पंचायत के गोविंदपुर, जफरपुरा ग्राम पंचायत के आजाद नगर तथा अहरौरा क्षेत्र के पास कुल पांच प्राथमिक विद्यालयों का निर्माण कराया गया था। बताया जाता है कि प्रत्येक विद्यालय के निर्माण पर करीब 8 से 10 लाख रुपये खर्च किए गए। इन विद्यालयों का उद्देश्य ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों को उनके आसपास ही प्राथमिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराना था। UP News
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक एक-दो विद्यालयों को छोड़कर अलमापुर और भैंसा सुर जैसे विद्यालयों में अभी तक पठन-पाठन का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। विद्यालयों में बच्चों की नियमित आवाजाही और देखरेख नहीं होने का असर अब भवन और वहां लगाए गए संसाधनों पर भी दिखाई देने लगा है। बताया जा रहा है कि असामाजिक तत्वों ने स्कूल परिसरों से सोलर पैनल, सबमर्सिबल पंप, पानी की टंकी, नल की पाइप और टोटियां तक उखाड़ ली हैं। इसके अलावा शौचालय की टंकी, किचन, कार्यालय के खिड़की-दरवाजे, सीढ़ी और रैंप की रेलिंग समेत कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। स्कूलों में पढ़ाई शुरू नहीं होने और नियमित निगरानी के अभाव में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने की स्थिति ने विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन भवनों में बच्चों की पढ़ाई शुरू होती और नियमित निगरानी होती तो स्कूलों की यह स्थिति नहीं बनती। UP News
इस मामले में एबीएसए कार्यालय बहुआर की ओर से बताया गया कि संबंधित विद्यालयों में प्रभारी अध्यापकों की नियुक्ति की गई है, लेकिन पढ़ने वाले बच्चों की उपलब्धता नहीं है। विभाग की ओर से इन विद्यालय भवनों को आंगनबाड़ी केंद्रों को हस्तांतरित करने की योजना बनाए जाने की बात भी कही गई है। हालांकि, सवाल यह है कि जिन भवनों का निर्माण प्राथमिक विद्यालय के रूप में गरीब बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, उनका उपयोग शुरू होने से पहले ही यदि दूसरे कार्य के लिए करने की तैयारी है तो इसके पीछे की वजह क्या है। UP News
अन्नदाता मंच के संयोजक चौधरी रमेश सिंह ने विद्यालयों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि लाखों रुपये की लागत से बने स्कूलों का उपयोग नहीं होना और देखरेख के अभाव में उनका जर्जर होना सरकारी धन की बर्बादी है। उन्होंने शासन से मामले का तत्काल संज्ञान लेने, विद्यालयों में पठन-पाठन शुरू कराने तथा क्षतिग्रस्त भवन और वहां लगे सामान की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। UP News
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