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प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) में मंगलवार को फायर सेफ्टी मॉकड्रिल के दौरान बड़ा हादसा हो गया।

UP News : प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) में मंगलवार को फायर सेफ्टी मॉकड्रिल के दौरान बड़ा हादसा हो गया। सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग में फायर सिस्टम की जांच के समय अचानक पाइपलाइन फट गई, जिससे अस्पताल परिसर में तेज पानी का बहाव शुरू हो गया और कई महत्वपूर्ण विभाग जलभराव की चपेट में आ गए। इस घटना ने अस्पताल की आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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जानकारी के अनुसार, लखनऊ अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर सभी बड़े अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम की जांच और मॉकड्रिल की जा रही है। इसी क्रम में एसआरएन अस्पताल की सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग में मंगलवार को फायर सिस्टम की जांच की जा रही थी। जांच के दौरान पंप हाउस से जुड़ी पाइपलाइन पर अचानक दबाव बढ़ा और वह फट गई।
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पाइप फटने के बाद पानी का बहाव तेजी से पूरे परिसर में फैल गया। देखते ही देखते अस्पताल के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में जलभराव हो गया। इनमें शामिल रहे-
* डायलिसिस यूनिट
* सीटी स्कैन विभाग
* १८ सेक्शन
* रजिस्ट्रेशन काउंटर और ओपीडी क्षेत्र
जलभराव के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई जगह फिसलन की स्थिति भी बन गई, जिससे आवाजाही प्रभावित हुई।
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अचानक हुए इस घटनाक्रम से अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए अफरातफरी मच गई। मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया और स्टाफ ने तत्काल जलनिकासी की व्यवस्था शुरू की। अस्पताल प्रशासन ने तकनीकी टीम और सफाई कर्मचारियों को तुरंत मौके पर बुलाकर पानी निकालने का काम शुरू कराया। लगभग दो से ढाई घंटे की कड़ी मेहनत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया जा सका। मशीनों और पंप की मदद से पानी को बाहर निकाला गया और धीरे-धीरे अस्पताल सामान्य स्थिति में लौट सका। हालांकि इस दौरान अस्पताल की सेवाएं प्रभावित रहीं और कई मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी। अच्छी बात यह रही कि इस घटना में किसी मरीज या कर्मचारी को शारीरिक चोट नहीं आई। लेकिन इस हादसे ने अस्पताल की सुरक्षा तैयारियों और फायर सिस्टम की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फायर सेफ्टी सिस्टम का उद्देश्य आपात स्थिति में जीवन रक्षा करना होता है, लेकिन यदि परीक्षण के दौरान ही सिस्टम फेल हो जाए, तो वास्तविक आपदा में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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