
UP News : उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले की वह मजार, जो कभी आस्था का केंद्र मानी जाती थी, आज कई गंभीर सवालों के घेरे में है। चांद मियां की इस मजार पर बैठकर कभी अंगूठियां बेचने वाला जमालुद्दीन उर्फ ‘छांगुर बाबा’, देखते ही देखते एक ऐसे धर्मांतरण सिंडिकेट का हिस्सा बन गया, जिसने समाज और प्रशासन—दोनों को चौंका दिया। कभी गलियों में घूमकर मूंगा, गोमेद और अकीक जैसे रत्न बेचने वाला यह व्यक्ति, आज करोड़ों की अवैध संपत्ति और संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में है। जिस आलीशान कोठी पर आज बुलडोजर चल रहा है, वही उसकी ‘कामयाबी’ की गवाही देती है—या यूं कहें कि उसके गुनाहों का सबूत है।
छांगुर बाबा की कहानी चांद मियां की मजार से शुरू होती है। यही वह जगह थी जहां वह घंटों बैठता, अंगूठियां बेचता और लोगों से मेलजोल बढ़ाता। शुरू में वह धार्मिक भक्ति और तावीज़-रत्नों के ज़रिए अपनी पैठ बनाता रहा। वह मजार की सेवा में भी लगा रहा—चंदा देता, रंगाई-पुताई करवाता और निर्माण कार्यों में आर्थिक मदद करता। स्थानीय लोगों को वह एक धार्मिक व्यक्ति लगा, लेकिन पर्दे के पीछे वह एक बेहद खतरनाक जाल बुन रहा था।
सूत्रों के मुताबिक, छांगुर मजार कमेटी से जुड़ने के बाद युवतियों को निशाना बनाने लगा। खासकर वे लड़कियां जो आर्थिक रूप से कमजोर, मानसिक रूप से असहाय या पारिवारिक कलह से जूझ रही थीं। पहले उन्हें तावीज़ और ‘हिफाजती’ नग के नाम पर झांसे में लिया जाता, फिर पैसों और शादी के लालच में धीरे-धीरे ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण की राह पर धकेल दिया जाता। UP News
धर्मांतरण के इस गोरखधंधे से मिली कमाई का इस्तेमाल छांगुर बाबा ने एक ऐसी कोठी बनाने में किया, जो किसी वीआईपी की सुरक्षा में भी पीछे न रहे। तीन बीघे में फैली इस हवेली में 50 से ज़्यादा लोगों के रहने की व्यवस्था थी। चारों ओर ऊंची दीवारें, CCTV कैमरे, करंट युक्त फेंसिंग और खतरनाक कुत्ते—यह सब एक बाबा की कोठी में क्यों? जवाब वही है: यह साधु के वेश में छिपा एक सिस्टम था, जो धर्म के नाम पर लोगों की पहचान बदल रहा था।
विशेषज्ञ बताते हैं कि कोठी का निर्माण पुलों में इस्तेमाल होने वाले मजबूत सरिए और भारी भरकम कॉन्क्रीट से किया गया था। साफ है कि बाबा को न सिर्फ पैसे की कमी नहीं थी, बल्कि वह खुद को किसी संभावित कार्रवाई के लिए पहले से तैयार कर चुका था। छांगुर बाबा उर्फ जमालुद्दीन फिलहाल लखनऊ की जेल में बंद है। उत्तर प्रदेश एटीएस ने कुछ समय पहले उसे गिरफ्तार किया था और उसके पूरे नेटवर्क की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। जांच एजेंसियां यह जानने में जुटी हैं कि उसके पीछे कौन-कौन से लोग थे और यह नेटवर्क किन-किन राज्यों में फैला हुआ था। UP News