उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के मझोला थाना क्षेत्र स्थित मियां कॉलोनी से 11 सितंबर की शाम करीब 5 बजे दो बच्चों के लापता होने के मामले में पुलिस के दावे और परिजनों की बताई कहानी में अंतर सामने आया है।

UP News : उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के मझोला थाना क्षेत्र स्थित मियां कॉलोनी से 11 सितंबर की शाम करीब 5 बजे दो बच्चों के लापता होने के मामले में पुलिस के दावे और परिजनों की बताई कहानी में अंतर सामने आया है। पुलिस की ओर से दावा किया गया कि दोनों बच्चों को करीब एक घंटे के भीतर तलाश कर उनके परिवार को सौंप दिया गया। वहीं, बच्चों के परिजनों का आरोप है कि उन्हें पुलिस की मदद से नहीं, बल्कि एक व्यक्ति से मिली सूचना के बाद स्वयं तलाश कर बच्चों को वापस लाना पड़ा। UP News
परिजनों के मुताबिक, दोनों बच्चों के लापता होने के बाद परिवार के लोग गुमशुदगी दर्ज कराने के लिए पुलिस चौकी पहुंचे थे। आरोप है कि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें थाने जाने के लिए कहा। इसके बाद परिवार ने पत्रकार शाहरुख हुसैन से संपर्क किया। परिवार के अनुसार, पत्रकार ने मझोला थाना प्रभारी को फोन के माध्यम से मामले की जानकारी दी। इसके बाद सोशल मीडिया के जरिए DGP उत्तर प्रदेश, DIG मुरादाबाद और SSP मुरादाबाद को भी मामले की जानकारी दी गई। UP News
परिवार का कहना है कि मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद पत्रकार नासिर ने उनसे संपर्क किया। उन्होंने परिजनों को जानकारी दी कि दोनों बच्चे जयंतीपुर में एक व्यक्ति के पास हैं। सूचना मिलने के बाद परिजन बताए गए स्थान पर पहुंचे और दोनों बच्चों को अपने साथ वापस ले आए। परिजनों का दावा है कि बच्चों की तलाश और उन्हें वापस लाने में पुलिस की ओर से उन्हें कोई विशेष मदद नहीं मिली। UP News
परिजनों का आरोप है कि बच्चों के मिलने के बाद पुलिस ने परिवार को बुलाया और बच्चों के साथ फोटो खिंचवाए। इसके बाद अधिकारियों को यह जानकारी दी गई कि पुलिस ने करीब एक घंटे के भीतर दोनों बच्चों को तलाश कर परिवार को सौंप दिया। परिवार का कहना है कि वास्तविक स्थिति इससे अलग थी और बच्चों की जानकारी उन्हें एक व्यक्ति के माध्यम से मिली थी, जिसके बाद परिजन स्वयं वहां पहुंचे और बच्चों को वापस लेकर आए। UP News
इस पूरे मामले में फिलहाल पुलिस के दावे और परिजनों के आरोप आमने-सामने हैं। परिजनों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने बच्चों की तलाश में मदद की और उन्हें परिवार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, तो उसके प्रयास की सराहना होनी चाहिए थी। हालांकि, पुलिस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह मामला पुलिस के दावे और परिवार की बताई घटना के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। UP News
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