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उत्तर प्रदेश के इस शक्तिशाली परिवार ने बुधवार को अपने लाड़ले बेटे प्रतीक यादव को खो दिया है। प्रतीक यादव उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे तथा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के छोटे भाई थे।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुलायम सिंह यादव का परिवार किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उत्तर प्रदेश के इस शक्तिशाली परिवार ने बुधवार को अपने लाड़ले बेटे प्रतीक यादव को खो दिया है। प्रतीक यादव उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे तथा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के छोटे भाई थे। प्रतीक यादव के अचानक हुए निधन के बाद यादव परिवार के अनेक किस्से सामने आ रहे हैं। प्रतीक यादव की मौत के बाद नेता जी के नाम से प्रसिद्ध मुलायम सिंह यादव की अनोखी प्रेम कहानी (Love Story) भी चर्चा का विषय बन गई है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की निजी जिंदगी का यह एक बड़ा सच है कि उन्होंने दो शादियां की थीं। मुलायम सिंह यादव के परिवार को निकट से जानने वाले एक वयोवृद्ध नेता ने बताया कि एक समय में साधना गुप्ता ने नेता जी मुलायम सिंह यादव की माँ की बहुत सेवा की थी। मुलायम सिंह यादव की माँ मूर्ति देवी अंतिम समय में जब अस्पताल में भर्ती थीं तो साधना गुप्ता ने उनकी सेवा में पूरा समर्पण दिखाया था। माँ की इतनी सेवा करने वाली साधना गुप्ता को सेवा करते हुए देखकर मुलायम सिंह यादव ने उन्हें अपनी जीवन संगिनी बनाने का फैसला कर लिया था। यह फैसला ही मुलायम सिंह यादव तथा साधना गुप्ता की शादी का आधार बन गया था।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव तथा साधना गुप्ता की प्रेम कहानी यानी कि (Love Story) 1980 के दशक में शुरू हुई थी। 1980 के दशक में मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक उभरते हुए सितारे थे। साधना गुप्ता समाजवादी पार्टी की एक कार्यकर्ता थीं और वो उम्र में मुलायम सिंह से लगभग 20 साल छोटी थीं। साधना गुप्ता बेहद खूबसूरत थीं और उनकी तीक्ष्ण बुद्धि ने मुलायम सिंह यादव को प्रभावित किया। ये प्रेम कहानी तब परवान चढ़ी जब मुलायम सिंह की मां मूर्ति देवी बीमार थीं। मुलायम सिंह ने अपनी माँ को इलाज के लिए लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया, जहां साधना गुप्ता ने मूर्ती देवी की दिन-रात सेवा की। मुलायम सिंह के परिवार से जुड़े एक नेता ने बताया कि अस्पताल में एक नर्स जब मूर्ती देवी को इंजेक्शन लगाने में गलती कर रही थी, तब ही साधना गुप्ता ने उसे टोका। इस समर्पण ने मुलायम सिंह के दिल में साधना के लिए सम्मान और प्रेम को और गहरा कर दिया। साधना गुप्ता ने एक बेटी की तरह मूर्ती देवी की सेवा की, जिसे देखकर ही मुलायम सिंह उन्हें दिल दे बैठे, लेकिन उस समय मुलायम सिंह यादव विवाहित थे। इसके बाद भी मुलायम सिंह और साधना गुप्ता के प्रेम के किस्से चर्चा का विषय बन गए थे।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने साधना गुप्ता के साथ अपने रिश्ते को लोगों से काफी दिन तक छुपाए नहीं रखा। राजनीतिक हलकों में दबी जुबान में चर्चाएं तो थीं, लेकिन मुलायम सिंह ने इस रिश्ते को कभी सार्वजनिक नहीं किया। मुलायम सिंह यादव अपनी पहली पत्नी मालती देवी और बेटे अखिलेश यादव के प्रति अपनी जिम्मेदारियों और अपनी राजनीतिक छवि को लेकर बहुत सतर्क थे। साधना गुप्ता लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहीं, लेकिन समाजवादी कुनबे के भीतर उनकी मौजूदगी को महसूस किया जाने लगा था। साधना गुप्ता सालों तक लखनऊ के एक बंगले में गुमनामी में रहीं, ताकि मुलायम सिंह की राजनीतिक छवि और अखिलेश यादव के भविष्य पर कोई आंच न आए। प्रतीक यादव के स्कूल फॉर्म पर पिता का नाम एमएस यादव और पते में मुलायम सिंह के ऑफिस का पता दिया गया था। मुलायम सिंह यादव का साधना के प्रति प्रेम इतना गहरा था कि उन्होंने विरोध के बावजूद इस रिश्ते को खत्म नहीं होने दिया। जैसे-जैसे समय बीता, मुलायम सिंह के जीवन में साधना गुप्ता का प्रभाव बढ़ता गया। इस प्रेम में कहानी का सबसे बड़ी बाधा 'पारिवारिक स्वीकृति' थी। यही वजह थी कि तमाम चर्चा के बाद भी मुलायम सिंह ने इस रिश्ते को दुनिया से छिपाए रखा।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपनी माँ मालती देवी के प्रति समर्पित थे और वे साधना गुप्ता के साथ अपने पिता के संबंधों के सख्त खिलाफ थे। सालों तक समाजवादी पार्टी के भीतर एक अघोषित युद्ध चलता रहा। ऐसे में 2003 में मुलायम सिंह की पहली पत्नी मालती देवी का निधन हो गया, इसके बाद साधना गुप्ता को घर में स्थान देने की मांग तेज होने लगी। अखिलेश यादव अब भी तैयार नहीं थे। मामला तब और पेचीदा हो गया जब अमर सिंह ने इस रिश्ते को आधिकारिक पहचान दिलाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। अमर सिंह के हस्तक्षेप और कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए साल 2007 में एक अदालती हलफनामे के माध्यम से मुलायम सिंह ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि साधना गुप्ता उनकी दूसरी पत्नी हैं। इसके अलावा प्रतीक यादव उनके बेटे हैं। यह वह क्षण था जब सालों से चल रहा 'सीक्रेट' एक आधिकारिक हकीकत बन गया। ये साधना गुप्ता की कई सालों की तपस्या की जीत थी और उन्हें अंतत: 'नेताजी' के परिवार की छोटी बहू का दर्जा मिला। मुलायम सिंह और साधना गुप्ता की शादी कोई सामान्य विवाह नहीं था, बल्कि दो अलग-अलग व्यक्तित्वों का एक ऐसा मेल था, जिसने मुलायम सिंह यादव के परिवार की पूरी संरचना को बदल दिया।
उत्तर प्रदेश की राजनीति को जानने वाला हर व्यक्ति साधना गुप्ता का नाम जानता है। साधना गुप्ता खुलकर कभी राजनीति या सरकार में सामने नहीं आई। सक्रिय रूप से राजनीति में ना आने के बावजूद उत्तर प्रदेश की व्यवस्था में साधना गुप्ता का डंका बजता था। मुलायम सिंह यादव के हर फैसले में साधना गुप्ता की राय शामिल रहती थी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के फैसलों को अपने हिसाब से चलाने वाली साधना गुप्ता को सुपर चीफ मिनिस्टर भी कहा जाता था। साधना गुप्ता के बेटे प्रतीक यादव ने राजनीति के बजाय बिजनेस को चुना, लेकिन उनकी बहू अपर्णा यादव ने जरूर राजनीति में कदम रखा। जुलाई 2022 में साधना गुप्ता का बीमारी के कारण निधन हो गया और इसके तीन महीनों के बाद अक्टूबर 2022 में मुलायम सिंह यादव ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। माता-पिता के जाने के बाद प्रतीक यादव काफी अकेले पड़ गए थे,हालांकि वे अपने काम में व्यस्त रहने की कोशिश करते थे। प्रतीक यादव के निधन से वह कड़ी टूट गई है जो मुलायम सिंह यादव के 'दूसरे परिवार' का प्रतिनिधित्व करती थी।
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