श्रावण मास में जहां देशभर में शिवभक्त कांवड़ यात्रा के रंग में रंगे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के मेरठ के फलावदा कस्बे से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने धार्मिक सौहार्द और इंसानियत की नई मिसाल पेश की है।

UP News : श्रावण मास में जहां देशभर में शिवभक्त कांवड़ यात्रा के रंग में रंगे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के मेरठ के फलावदा कस्बे से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने धार्मिक सौहार्द और इंसानियत की नई मिसाल पेश की है। आर्थिक रूप से बेहद साधारण परिवार से आने वाले 22 वर्षीय शाकिर ने हरिद्वार से 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाकर यह संदेश दिया है कि सच्ची आस्था किसी धर्म, जाति या आर्थिक स्थिति की सीमाओं में नहीं बंधती। UP News
मेरठ के फलावदा कस्बे के मोहल्ला होली चौक, मंदवाड़ी रोड निवासी मंजूर का बेटा शाकिर मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता है। सीमित संसाधनों के बावजूद भगवान शिव के प्रति उसकी श्रद्धा वर्षों से अटूट बनी हुई है। पिछले तीन वर्षों से वह नियमित रूप से श्रावण मास में कांवड़ यात्रा कर रहा है और शिव आराधना को अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। UP News
शाकिर ने वर्ष 2025 में हरिद्वार से 101 लीटर गंगाजल लाकर फलावदा और गढ़ीना के शिवालयों में जलाभिषेक किया था। इस बार उसने अपनी श्रद्धा को और आगे बढ़ाते हुए 201 लीटर पवित्र गंगाजल की कांवड़ उठाई है। वह पूरे उत्साह और समर्पण के साथ अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा है, जहां भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा। शाकिर की कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे का संदेश भी बन गई है। उसकी पहल यह दर्शाती है कि आस्था का संबंध इंसान के मन से होता है, न कि उसकी पहचान से। यही कारण है कि उसकी यात्रा को लोग सांप्रदायिक सौहार्द और साझा संस्कृति की खूबसूरत मिसाल के रूप में देख रहे हैं। UP News
हरिद्वार से लौटते समय रुड़की समेत विभिन्न पड़ावों पर लगे कांवड़ सेवा शिविरों में शाकिर का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। शिवभक्तों और सेवा शिविरों के स्वयंसेवकों ने उसकी श्रद्धा और समर्पण की सराहना करते हुए उसे सम्मानित किया। कई स्थानों पर तालियों की गड़गड़ाहट और 'हर-हर महादेव' के जयघोष के बीच उसका उत्साह बढ़ाया गया। उसकी यात्रा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। UP News
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