मुजफ्फरनगर में 10 साल पुराने नशीले पदार्थ मामले में अशोक भारती दोषमुक्त। जज रवि कुमार दिवाकर ने न्याय में देरी और ‘तारीख पर तारीख’ पर अहम टिप्पणी की।

UP News : उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में करीब 10 साल पुराने नशीले पदार्थ से जुड़े मामले में अशोक भारती को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है। इस मामले में फैसला सुनाते हुए विशेष NDPS अदालत के न्यायाधीश रवि दिवाकर ने न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले लंबे समय को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। न्यायाधीश रवि दिवाकर ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक बेगुनाह व्यक्ति को निर्दोष साबित होने में 10 साल लग गए। अदालत के चक्कर काटते रहना भी किसी दंड से कम नहीं है। मामले में नई मंडी कोतवाली पुलिस ने अशोक भारती को गिरफ्तार किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अशोक भारती को 21 अक्टूबर 2025 को जेल भेजा गया था। इस प्रकरण में अदालत के फैसले के बाद न्यायिक प्रक्रिया के दौरान लगे लंबे समय को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। UP News
यह मामला वर्ष 2015 में दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार, 21 अक्टूबर 2015 को नई मंडी कोतवाली क्षेत्र में अशोक भारती को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उनकी कुर्ते की जेब से लगभग 150 ग्राम चरस बरामद करने का दावा किया था। मामले में वर्ष 2016 में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। 17 सितंबर 2026 को सुनाए गए फैसले में अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों में कई कमियां पाईं। बरामदगी से जुड़े साक्ष्यों में विरोधाभास, स्वतंत्र गवाहों की अनुपस्थिति और NDPS कानून के प्रावधानों के अनुपालन से जुड़े सवाल सामने आए। अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अशोक भारती को दोषमुक्त कर दिया। UP News
फैसला सुनाते हुए जज रवि दिवाकर ने कहा कि किसी व्यक्ति को अपनी बेगुनाही साबित करने में 10 साल लग जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने टिप्पणी की कि अदालतों में लंबे समय तक मुकदमे का सामना करना और लगातार तारीखों पर पेश होना भी एक तरह का दंड है। अदालत की इस टिप्पणी में उस परेशानी को रेखांकित किया गया, जिसका सामना किसी व्यक्ति को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया से गुजरने के दौरान करना पड़ सकता है। UP News
फैसले के दौरान जज रवि दिवाकर ने हिंदी फिल्म ‘दामिनी’ के चर्चित डायलॉग ‘तारीख पर तारीख मिलती है, न्याय नहीं’ का भी उल्लेख किया। इस संवाद के जरिए न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली देरी के मुद्दे को सामने रखा गया। अदालत की टिप्पणी ने लंबे समय तक मुकदमे चलने और न्याय मिलने में देरी के सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है। UP News
अशोक भारती को दोषमुक्त किए जाने के साथ ही न्यायिक प्रक्रिया में देरी का मुद्दा भी सामने आया है। वर्षों तक मुकदमे का सामना करने वाले लोगों पर पड़ने वाले सामाजिक, आर्थिक और मानसिक प्रभाव को लेकर न्यायालयों में समय-समय पर चिंता व्यक्त की जाती रही है। मुजफ्फरनगर के इस फैसले में न्यायाधीश की टिप्पणी ने एक बार फिर सवाल उठाया है कि मुकदमों का समयबद्ध निपटारा और साक्ष्यों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना न्याय व्यवस्था के लिए कितना महत्वपूर्ण है। UP News
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