मुजफ्फरनगर फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर ने पत्नी हत्या मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि वह डरपोक जज कहलाने के बजाय मरना पसंद करेंगे। गंभीर मामलों को कोर्ट से हटाए जाने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई।

UP News : उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) में फास्ट ट्रैक कोर्ट थर्ड के जज रवि कुमार दिवाकर की एक टिप्पणी ने न्यायिक व्यवस्था को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। करीब आठ वर्ष पुराने पत्नी की हत्या के मामले में फैसला सुनाते समय जज दिवाकर ने अपनी पीड़ा और नाराजगी खुलकर जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह दबाव या भय में काम करने वाले न्यायाधीश के रूप में पहचाने जाना पसंद नहीं करेंगे। जज रवि कुमार दिवाकर ने कहा, “मैं मरना पसंद करूंगा, लेकिन डरपोक जज कहलाना पसंद नहीं करूंगा।” उनकी इस टिप्पणी के बाद अदालत परिसर में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई कि आखिर किन परिस्थितियों में उन्हें इतनी कड़ी बात कहनी पड़ी।
फैसला सुनाने के दौरान जज दिवाकर ने अपनी कोर्ट से गंभीर आपराधिक मामलों को वापस लिए जाने को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से वह काफी आहत और दुखी हैं। जज के मुताबिक, उनकी अदालत से ऐसे मामले भी हटाए गए, जिनमें गैंगस्टर और माफिया जैसे आरोपों का सामना कर रहे लोगों के खिलाफ सुनवाई होनी थी। हालांकि, इन मामलों को किन परिस्थितियों में और किस स्तर पर दूसरी अदालत में स्थानांतरित किया गया, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
रवि कुमार दिवाकर अपने सख्त फैसलों और बेबाक टिप्पणियों के कारण पहले भी चर्चा में रहे हैं। उनके कार्यकाल को लेकर यह दावा भी सामने आया है कि उन्होंने महज चार महीने की अवधि में 22 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई। इन फैसलों के चलते जज दिवाकर की कार्यशैली को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। अब पत्नी की हत्या के मामले में फैसला सुनाते समय उनकी टिप्पणी ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है।
जज दिवाकर के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी अदालत से गंभीर मामलों को हटाए जाने के पीछे वास्तविक कारण क्या थे। क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी? इन सवालों का जवाब संबंधित न्यायिक रिकॉर्ड और आधिकारिक जानकारी से ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल जज की “कायर या डरपोक जज कहलाने के बजाय मरना पसंद करूंगा” वाली टिप्पणी ने न्यायपालिका में दबाव, स्वतंत्र न्यायिक कार्यप्रणाली और गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है।UP News :
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