मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक पुराने मामले में अदालत ने 22 आरोपियों के खिलाफ चल रहे मुकदमे को वापस लेने का आदेश स्वीकार कर लिया है। मामला वर्ष 2013 में नगला मंदौड़ में आयोजित शोकसभा के दौरान निषेधाज्ञा के उल्लंघन और सरकारी काम में बाधा डालने से जुड़ा था।

UP News : मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक पुराने मामले में अदालत ने 22 आरोपियों के खिलाफ चल रहे मुकदमे को वापस लेने का आदेश स्वीकार कर लिया है। मामला वर्ष 2013 में नगला मंदौड़ में आयोजित शोकसभा के दौरान निषेधाज्ञा के उल्लंघन और सरकारी काम में बाधा डालने से जुड़ा था। शासन की संस्तुति के बाद विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने मुकदमा वापसी की अनुमति दे दी। इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, पूर्व मंत्री सुरेश राणा, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री कपिल देव अग्रवाल, सपा सांसद हरेंद्र मलिक समेत 22 लोगों के नाम शामिल थे। विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट के पीठासीन अधिकारी डॉ. देवेंद्र सिंह फौजदार ने मुकदमा वापस लेने संबंधी आदेश पारित किया। UP News
यह मामला वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक तनाव के दौरान दर्ज हुआ था। 27 अगस्त 2013 को कवाल गांव में गौरव और सचिन की हत्या के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया था। दोनों की अंत्येष्टि के बाद बड़ी संख्या में लोग कवाल पहुंचे, जहां आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। इसके बाद 31 अगस्त को शोकसभा आयोजित करने का ऐलान किया गया था। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को देखते हुए धारा 144 लागू कर कवाल के आसपास करीब पांच किलोमीटर के दायरे में जनसभा और शोकसभा पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग नगला मंदौड़ स्थित भारतीय इंटर कॉलेज के मैदान में एकत्र हुए थे। UP News
पुलिस ने शोकसभा के मामले में कुल 22 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया था। आरोपियों पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और भड़काऊ भाषण समेत अन्य आरोप लगाए गए थे। बाद में दंगों की जांच के लिए गठित विशेष एसआईटी ने मामले की विवेचना की। जांच पूरी होने के बाद तत्कालीन विधायक सुरेश राणा, तत्कालीन भाजपा नेता संजीव बालियान, पूर्व विधायक उमेश मलिक, साध्वी प्राची, स्वामी यति नरसिंहानंद और शिवसेना नेता बिट्टू सिखेड़ा समेत 14 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया था। UP News
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद पिछली सरकार के कार्यकाल में दर्ज दंगों से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई थी। इसी प्रक्रिया के तहत इस मुकदमे समेत कई मामलों को वापस लेने की अनुमति शासन स्तर से दी गई। शासन के आदेश के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर अभियोजन अधिकारी ने नगला मंदौड़ शोकसभा मामले में अदालत में मुकदमा वापस लेने की अर्जी दाखिल की थी। यह प्रार्थना पत्र लंबे समय से अदालत में लंबित था। विशेष अदालत ने अब इसे स्वीकार कर लिया। UP News
मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में अदालत ने हत्या के आरोप में छह लोगों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। यह मामला भोपा थाना क्षेत्र में 7 सितंबर 2013 को हुई एक युवक की हत्या से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार, नंगला बुजुर्ग के पास भीड़ ने गय्युर और उसके भाई लताफत को घेरकर हमला किया था। गय्युर किसी तरह बचकर गन्ने के खेत में पहुंच गया, जबकि उसके भाई लताफत को भीड़ ने पकड़ लिया। आरोप था कि पिटाई के बाद उसकी मौत हो गई। UP News
विज्ञापन