UP News: मुजफ्फरनगर के मलिकपुरा में कवाल कांड में मारे गए सचिन और गौरव की पुण्यतिथि पर आज हवन व श्रद्धांजलि कार्यक्रम। भाजपा नेताओं की भागीदारी से आयोजन का राजनीतिक महत्व बढ़ा।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हिन्दू तथा मुस्लिम समाज के लिए 28 अगस्त (आज) का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। आपको याद दिला दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 28 अगस्त का दिन एक बार फिर वर्ष 2013 की उस घटना की याद लेकर आया है जिसने पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को झकझोर दिया था। कवाल कांड में मारे गए ममेरे-फुफेरे भाई सचिन और गौरव की पुण्यतिथि पर शुक्रवार को ग्राम मलिकपुरा में श्रद्धांजलि एवं हवन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक हलचल भी दिखाई दे रही है। भाजपा के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की कार्यक्रम में प्रमुख भागीदारी बताई जा रही है।
सचिन और गौरव की पुण्य स्मृति में ग्राम मलिकपुरा में आयोजित कार्यक्रम में हवन-यज्ञ और श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जा रही है। आयोजन से जुड़े लोगों की ओर से लोगों से कार्यक्रम में पहुंचकर दोनों को श्रद्धांजलि अर्पित करने की अपील पहले से ही जारी कर दी थी। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में स्थित मलिकपुरा गांव में पुण्यतिथि का कार्यक्रम 28 अगस्त को सुबह आठ बजे शुरू हुआ। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में सचिन और गौरव की पुण्यतिथि पर हर वर्ष कार्यक्रम आयोजित होता रहा है। वर्ष 2025 में उनकी 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर भी मलिकपुरा में हवन-यज्ञ और श्रद्धांजलि सभा हुई थी जिसमें पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान समेत भाजपा के कई प्रमुख नेता शामिल हुए थे। आज के कार्यक्रम में भी पूर्व सांसद तथा पूर्व केंद्रिय मंत्री डॉ. सजीव बालियान की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
सचिन और गौरव की मौत की कहानी 27 अगस्त 2013 को कवाल गांव में हुए विवाद से जुड़ी है। उपलब्ध ऐतिहासिक रिपोर्टों के अनुसार कवाल में शाहनवाज की मौत के बाद गुस्साई भीड़ ने सचिन और गौरव की हत्या कर दी थी। इसके बाद यह घटना तेजी से बड़े सांप्रदायिक तनाव में बदल गई और मुजफ्फरनगर तथा आसपास के इलाकों में हिंसा फैल गई। इस घटना के बाद मुजफ्फरनगर दंगों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और हजारों परिवार प्रभावित हुए। वर्षों बाद भी कवाल और मलिकपुरा का नाम उस दौर की घटनाओं के संदर्भ में लिया जाता है।
सचिन और गौरव की स्मृति को स्थायी रूप देने के लिए मलिकपुरा में स्मारक भी बनाया गया है। वर्ष 2025 की पुण्यतिथि के अवसर पर ढाई बीघा जमीन पर दोनों के स्मारक को विकसित करने की बात सामने आई थी। वर्तमान में इसी स्मारक स्थल पर दोनों की पुण्यतिथि के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। आयोजन समिति की ओर से वर्ष 2026 के कार्यक्रम में 2013 की हिंसा में मारे गए अन्य लोगों को भी श्रद्धासुमन अर्पित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सचिन और गौरव की पुण्यतिथि का कार्यक्रम केवल पारिवारिक श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा है। पिछले वर्षों में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने इसमें पहुंचकर श्रद्धांजलि दी है। वर्ष 2023 में तत्कालीन केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल समेत कई लोग कार्यक्रम में शामिल हुए थे। वर्ष 2025 में भी पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल, पूर्व विधायक विक्रम सैनी, भाजपा जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी और पूर्व विधायक उमेश मलिक समेत कई प्रमुख लोग मलिकपुरा पहुंचे थे। इसी वजह से इस वर्ष का कार्यक्रम भी मुजफ्फरनगर की स्थानीय राजनीति और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक माहौल के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज के इस कार्यक्रम में भी भाजपा के अनेक बड़े नेता, जिले के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता नजर आ रहे हैं।
2013 की घटना को 13 वर्ष पूरे हो चुके हैं लेकिन सचिन और गौरव की पुण्यतिथि हर साल उस दौर की यादों को फिर सामने ले आती है। खास बात यह है कि हाल के वर्षों में स्थानीय स्तर पर दोनों समुदायों के बीच सामान्य सामाजिक जीवन और भाईचारे को लेकर भी चर्चा होती रही है। ताजा रिपोर्टों में कवाल और आसपास के क्षेत्र में लोग पुराने दौर को पीछे छोड़कर सामान्य जीवन जीने की बात करते नजर आते हैं। ऐसे में आज का कार्यक्रम एक तरफ सचिन और गौरव की स्मृति को समर्पित है तो दूसरी तरफ मुजफ्फरनगर के उस संवेदनशील इतिहास की ओर भी ध्यान खींचता है जिसकी छाया पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति पर लंबे समय तक रही।
सचिन और गौरव की पुण्यतिथि के कार्यक्रम को देखते हुए कवाल और मलिकपुरा क्षेत्र पहले भी प्रशासन की निगरानी में रहा है। पिछले आयोजनों में सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया जाता रहा है। वर्ष 2014 में भी पुण्यतिथि कार्यक्रम को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया था। इस वर्ष भी कार्यक्रम को लेकर स्थानीय प्रशासन की सक्रियता पर नजर रहेगी। हालांकि वर्तमान आयोजन को लेकर उपलब्ध ताजा जानकारी में किसी अप्रिय स्थिति की पुष्टि नहीं हुई है।
कवाल कांड के बाद मुजफ्फरनगर की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह घटना लंबे समय तक प्रमुख मुद्दा बनी रही। भाजपा के कई नेता बाद के वर्षों में सचिन और गौरव की पुण्यतिथि के कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं। आज एक बार फिर मलिकपुरा में होने वाला श्रद्धांजलि कार्यक्रम इस घटना को राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से चर्चा में ला रहा है। चेतना मंच की नजर इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं, श्रद्धांजलि सभा में दिए जाने वाले बयानों और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर रहेगी। कार्यक्रम के दौरान सामने आने वाले महत्वपूर्ण अपडेट को भी खबर में जोड़ा जाएगा।
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