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उर्दू अदब की दुनिया में नासिर काज़मी एक ऐसा नाम हैं, जिनकी शायरी आज भी दिलों को छू जाती है। 8 दिसंबर 1925 को पंजाब में जन्मे नासिर काज़मी ने अपने शब्दों से भावनाओं को एक नई गहराई दी।

Nasir Kazmi : उर्दू अदब की दुनिया में नासिर काज़मी एक ऐसा नाम हैं, जिनकी शायरी आज भी दिलों को छू जाती है। 8 दिसंबर 1925 को पंजाब में जन्मे नासिर काज़मी ने अपने शब्दों से भावनाओं को एक नई गहराई दी। बाद में वे पाकिस्तान चले गए, जहाँ उन्होंने साहित्यिक दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। Nasir Kazmi
उनकी शायरी में सादगी के साथ दर्द, तन्हाई और इंसानी एहसासों की बारीक झलक देखने को मिलती है। ‘बंग-ए-नौ’ और ‘पहली बारिश’ जैसे उनके संग्रह उर्दू साहित्य में मील का पत्थर माने जाते हैं। 2 मार्च 1972 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी शायरी आज भी पाठकों के दिलों में जिंदा है और आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करती रहेगी। Nasir Kazmi
1 - दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तिरी याद थी अब याद आया ।

2- जिन्हें हम देख कर जीते थे 'नासिर'
वो लोग आँखों से ओझल हो गए हैं

3 - आज तो बे-सबब उदास है जी
इश्क़ होता तो कोई बात भी थी

4 - तिरे आने का धोका सा रहा है
दिया सा रात भर जलता रहा है

5 - यूँ तो हर शख़्स अकेला है भरी दुनिया में
फिर भी हर दिल के मुक़द्दर में नहीं तन्हाई

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