प्रयागराज के झूंसी में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत से इलाके में शोक है। आखिर इस घटना से जुड़े कौन से पहलू सामने आए हैं। पढ़े पूरी खबर।

UP News:उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। झूंसी थाना क्षेत्र के त्रिवेणीपुरम इलाके में NEET की तैयारी कर रही 18 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। छात्रा ने कथित तौर पर अपने पिता के लाइसेंसी हथियार से आत्महत्या की है। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। छात्रा मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रही थी। वह परीक्षा में सफलता हासिल नहीं कर पाने के बाद अगले प्रयास की तैयारी में जुटी थी। सोमवार को जब काफी देर तक वह अपने कमरे से बाहर नहीं आई तो परिजनों को चिंता हुई। इसके बाद घटना की जानकारी सामने आई और परिवार में चीख-पुकार मच गई। UP News
पुलिस के अनुसार, घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। नोट में छात्रा ने NEET परीक्षा पास नहीं कर पाने को लेकर अपनी निराशा जाहिर की थी और परिजनों से माफी मांगी थी। पुलिस को मिले नोट में उसकी पढ़ाई, भविष्य और मानसिक परेशानियों से जुड़ी बातें भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि छात्रा के पिता भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं। परिवार मूल रूप से गाजीपुर का रहने वाला है और पिछले करीब छह वर्षों से प्रयागराज के त्रिवेणीपुरम इलाके में रह रहा था। UP News
यह भी पढ़े: सड़क हादसों में आई कमी, नौ माह में 44 दुर्घटनाएं घटीं
घटना की सूचना मिलने के बाद झूंसी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य भी जुटाए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले की जांच की जा रही है और छात्रा की मौत से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है। प्रारंभिक रिपोर्टों में परीक्षा और काउंसलिंग से जुड़े तनाव का जिक्र किया गया है, हालांकि घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियां जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी। UP News
इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और उन पर बढ़ते दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। NEET जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी के दौरान विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ भावनात्मक सहयोग और परिवार के भरोसे की भी जरूरत होती है। परीक्षा में असफलता जीवन का अंत नहीं है। ऐसे समय में परिवार और आसपास के लोगों को विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति को समझना चाहिए और जरूरत पड़ने पर उन्हें पेशेवर मदद उपलब्ध करानी चाहिए। UP News
विज्ञापन