NEET UG 2025 में बड़ा फर्जीवाड़ा, उत्तर प्रदेश के ये जिले सबसे आगे
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 09:45 PM
NEET UG 2025 में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के तहत फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर दाखिला लेने वाले 71 छात्रों का एडमिशन रद्द कर दिया गया है। मामले की जांच के बाद मेडिकल शिक्षा निदेशालय ने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं और दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने की तैयारी है। UP News
कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा?
यह मामला तब सामने आया जब फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज में एक छात्र के दस्तावेजों की जांच के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र पर संदेह हुआ। इसके बाद आगरा के जिलाधिकारी से जांच करवाई गई जिसमें दस्तावेज फर्जी पाए गए। इस एक केस से शक गहराया और निदेशालय ने सभी मेडिकल कॉलेजों में इस कोटे के तहत दाखिला पाने वाले छात्रों के प्रमाण पत्रों की जांच शुरू करवाई।
88 सीटों में से 71 पर फर्जीवाड़ा
उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में राज्य कोटे के तहत कुल 4442 सीटें हैं जिनमें से 2% यानी 88 सीटें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रितों के लिए आरक्षित हैं। इनमें से 79 सीटें ऑनलाइन काउंसलिंग के जरिए भरी गईं, और चौंकाने वाली बात ये है कि इनमें से 71 सीटों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एडमिशन लिया गया था।
किस जिले से कितने फर्जी प्रमाण पत्र मिले?
जांच में जो रिपोर्ट सामने आई वो बेहद चौंकाने वाली है। बता दें कि, मेरठ में 15, सहारनपुर में 12, बलिया में 12, गाजीपुर में 9, भदोही में 9, वाराणसी में 3, गाजियाबाद में 2, आगरा में 1, बुलंदशहर में 1 प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। इस घोटाले में सबसे अधिक प्रमाण पत्र मेरठ और सहारनपुर जिलों से फर्जी निकले।
कड़ी कार्रवाई के निर्देश
चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक (DGMED) किंजल सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन छात्रों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश लिया है, उनका दाखिला रद्द कर दिया जाए और उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाए। साथ ही 2024 में हुए एडमिशन में भी इस कोटे का इस्तेमाल करने वालों की दोबारा जांच के आदेश दिए गए हैं।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटा उन परिवारों को सम्मान देने के लिए बनाया गया था, जिन्होंने देश की आजादी के लिए बलिदान दिया। ऐसे पवित्र कोटे का दुरुपयोग कर कई छात्रों ने न केवल नियमों का उल्लंघन किया, बल्कि ईमानदारी से मेहनत कर रहे हज़ारों छात्रों का हक भी मारा। जांच रिपोर्ट के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, जेल की संभावना और काउंसलिंग प्रक्रिया में नए सिरे से सुधार जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। इसके अलावा अधिकारियों को प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को भी और पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। UP News