परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का लगाया आरोप, मेडिकल कॉलेज ने जांच समिति गठित की; शुरुआती जांच में डॉक्टर और तीन स्टाफ नर्सों की भूमिका पर सवाल।

UP News : उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। परिजनों का आरोप है कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती महिला को समय पर स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया गया। मजबूरी में परिजन उसे पैदल ही लेबर रूम की ओर ले जा रहे थे, तभी रास्ते में प्रसव हो गया और नवजात फर्श पर गिर पड़ा। परिजनों का आरोप है कि इसी कारण नवजात की मौत हो गई। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने इस दावे से इनकार करते हुए कहा है कि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के अनुसार बच्चे की गर्भ में ही मृत्यु हो चुकी थी। दोनों पक्षों के दावों की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है।
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यह मामला हरदी थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर ग्राम पंचायत के नेपालपुरवा गांव का है। यहां की रहने वाली गर्भवती ज्योति को प्रसव पीड़ा होने पर उनके पति अमित शुक्ल रविवार को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उन्हें भर्ती कर लिया गया। डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद अल्ट्रासाउंड कराया और सोमवार को दवाएं दी गईं। परिजनों के अनुसार दोपहर करीब तीन बजे प्रसव पीड़ा असहनीय होने पर उन्होंने स्ट्रेचर की मांग की, लेकिन काफी देर तक स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया गया।
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परिजनों का आरोप है कि अस्पताल कर्मियों की ओर से कोई व्यवस्था न होने पर वे गर्भवती को सहारा देकर पैदल ही लेबर रूम की ओर ले जाने लगे। इसी दौरान महिला का प्रसव हो गया और नवजात फर्श पर गिर गया। परिवार का कहना है कि गिरने से नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने हंगामा करते हुए अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और अमानवीय व्यवहार के आरोप लगाए।
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मामले की सूचना मिलते ही मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय खत्री, प्रोफेसर डॉ. अमित श्रीवास्तव और सीएमएस डॉ. एस.के. वर्मा अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर उनके बयान दर्ज किए और पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए एक समिति का गठन किया। जांच पूरी होने तक संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा भी शुरू कर दी गई है।
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के अनुसार बच्चे की गर्भ में ही मृत्यु हो चुकी थी। प्राचार्य डॉ. संजय खत्री ने कहा कि यह भी जांच का विषय है कि महिला वार्ड से बाहर पैदल कैसे पहुंची। शुरुआती जांच में ड्यूटी पर तैनात एक डॉक्टर और तीन स्टाफ नर्सों की लापरवाही के संकेत मिले हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन समेत विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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फिलहाल इस मामले में परिजनों और अस्पताल प्रशासन के दावे एक-दूसरे से अलग हैं। नवजात की मौत की वास्तविक वजह और कथित लापरवाही की जिम्मेदारी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं और मरीजों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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