निदा फ़ाज़ली: आम ज़बान को शायरी की शान बनाने वाले बेमिसाल शायर

यही वजह है कि उनका योगदान सिर्फ शायरी तक नहीं ठहरता; गद्य में भी उनकी शैली ने अपनी अलग राह बनाई और उर्दू के गद्य साहित्य में नई संभावनाओं की पहचान कराई। वारिस अलवी के शब्दों में कहें तो निदा उन खुशक़िस्मत लोगों में हैं, जिनकी शायरी और नस्र दोनों पाठकों को रिझा गईं।

आम ज़बान में भी शायरी की शान निदा फ़ाज़ली

आम ज़बान में भी शायरी की शान निदा फ़ाज़ली

locationउत्तर प्रदेश
userAbhijeet Yadav
calendar08 Jan 2026 02:17 PM
bookmark

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें
चेतना दृष्टि
चेतना दृष्टि